नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को ग्रेटर नोएडा में स्थित सूरजपुर वेटलैंड (जल स्रोत वाली दलदली जमीन) के भीतर निर्माण गतिविधि पर रोक लगा दी है।
एनजीटी में याचिका दाखिल कर कहा गया था कि सूरजपुर वेटलैंड के पर्यावरण संवेदी क्षेत्र में स्थायी निर्माण किया जा रहा है। जिसके बाद एनजीटी ने यह निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।
जस्टिस यूडी साल्वी की अध्यक्षता वाली बेंच ने संबंधित मामले में 308 हेक्टेयर में फैले आरक्षित वन्य क्षेत्र में पेड़ काटने पर भी रोक लगा दी है। याची विक्रांत तोंगड़ ने इस मामले में याचिका दाखिल की थी।
याची का आरोप है कि वन विभाग के जरिए सूरजपूर वेटलैंड के पास सड़क निर्माण किया जा रहा है। इससे न सिर्फ वेटलैंड को नुकसान है बल्कि यह वन नियमों का भी उल्लंघन है।
बेंच ने कहा कि अवैध तरीके से एक भी पेड़ नहीं कटना चाहिए। इसके अलावा वेटलैंड और उसके इर्द-गिर्द किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए। वेटलैंड के पास निर्माण गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है।
मालूम हो कि हाल ही में एनजीटी ने संबंधित मामले में पर्यावरण मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार व उत्तर प्रदेश वन विभाग और संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हालांकि अब बेंच ने निर्माण कार्य पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।