नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कहा है कि जो लोग पेयजल के लिए भू-जल पर ही आश्रित हैं वे केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण से अनुमति लेकर घरों में बोरवेल लगा सकते हैं। एनजीटी ने आम लोगों को अनुमति के साथ बोरवेल लगाने के लिए राहत दे दी है।
जबकि बीते ही महीने एनजीटी ने यूपी के गाजियाबाद और हापुड़ जिले में औद्योगिक ईकाइयों और बिल्डर व पानी सप्लायर के बोरवेल को एक हफ्ते के भीतर सील करने का आदेश दिया था।
जस्टिस जावद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची सुशील राघव के मामले में यह आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि उनका इरादा आम लोगों की जिंदगियों को प्रभावित करना नहीं है जो पूरी तरह से पेय-जल के लिए भू-जल पर ही आश्रित हैं और उनके पास पानी के लिए न तो नगर निगम और न ही कोई और वैकल्पिक श्रोत है।
पीठ ने कहा कि प्राधिकरण ऐसे जरूरतमंदों को घरेलू बोरवेल के लिए केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण अनुमति दें। वहीं अवैध बोरवेल की सीलिंग को लेकर एनजीटी ने केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण से स्टेटस रिपोर्ट भी देने के लिए कहा है।
याची का आरोप था कि हापुड़ और गाजियाबाद जिले में कई औद्योगिक ईकाइयां अवैध तरीके से भू-जल का दोहन कर रही हैं जबकि प्राधिकरण इनके खिलाफ किसी तरह का एक्शन नहीं ले रहे हैं। इसके बाद बीते महीने एनजीटी ने अवैध बोरवेल को सील करने का आदेश दिया था।