हाईकोर्ट ने ग्रेटर नोएडा स्थित सुपरटेक के रिहायशी प्रोजेक्ट जार के 904 फ्लैटों को सील करने का आदेश वापस लेने से इंकार कर दिया है, मगर इन फ्लैटों में जो लोग रह रहे हैं, उनको रहने की छूट रहेगी, लेकिन इन फ्लैटों के बेचने, ट्रांसफर करने जैसे अधिकार सील रहेंगे।
कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में बिल्डर की अपील का शीघ्र निस्तारण करे। वीके शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने इससे पूर्व मानक पूरे नहीं होने के कारण इन फ्लैटों को सील करने का आदेश दिया था।
याची का कहना है कि बिल्डर ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के समक्ष अर्जी देकर अवैध निर्माण को कम्पाउंडिंग चार्ज लेकर नियमित करने की अर्जी दी थी, जिसे प्राधिकरण ने खारिज कर दिया है। इसके खिलाफ प्रदेश सरकार के समक्ष अपील दाखिल की गई है, जो अभी तक लंबित है।
अपील का निस्तारण होने तक फ्लैट सील करने का आदेश वापस ले लिया जाए। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। राज्य सरकार को अपील का जल्दी निस्तारण करने का आदेश दिया है।
सुपरटेक पर 1064 फ्लैट अवैध रूप से बनाने का आरोप है, जिसमें से 904 फ्लैटों को सील करने का आदेश दिया गया है। मामले पर अगली सुनवाई 10 मई को होगी। बता दें कि इन 904 फ्लैटों में करीब 100 परिवार रहते हैं। इस वजह से प्राधिकरण ने मौके पर इन सभी फ्लैटों को सील नहीं किया है।
कुछ फ्लैट खाली मिले उनको सील कर दिया है, लेकिन अन्य फ्लैटों को सील करने की कागजी कार्रवाई पूरी कर दी है, जिससे सुपरटेक इन फ्लैटों के साथ फिलहाल कुछ नहीं कर सकता। जब तक कि मामला कोर्ट में है।