रेलवे स्टेशन पर अब मासूम बच्चे खतरों के बीच जिंदगी नहीं बीताएंगे, वे भी अब बाहरी दुनिया देखेंगे और पढ़ाई-लिखाई कर जिंदगी संवारेंगे। बेआसरा बच्चों को सहारा देने शनिवार को प्रेरणा सेवा संस्थान (एनजीओ) के पदाधिकारी गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचे।
नशे और बुरी आदतों से घिर चुके 10 बच्चों को प्रेरणा संस्थान ने जीआरपी की मदद से रेलवे स्टेशन के उस दलदल से निकालकर शेल्टर होम पहुंचाया। यहां इन बच्चों को न केवल अच्छी जिंदगी मिलेगी, बल्कि शिक्षा भी देने की जिम्मेदारी भी उठाई जाएगी।
बेआसरा और रेलवे स्टेशन पर खतरों के बीच जिंदगी जी रहे बच्चों की पीड़ा को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। चार दिन बाद यह मुहिम रंग लाई।
सामाजिक संस्था प्रेरणा सेवा संस्थान के मैनेजिंग ट्रस्टी तरुण गुप्ता और कोआर्डिनेटर श्वेता ने जीआरपी इंस्पेक्टर विनोद सिरोही और एसएसआई पंकज लवानिया के साथ चलाई मुहिम में 10 बच्चों को रेस्क्यू किया गया।
जीआरपी अफसरों की मौजूदगी में बच्चों बातचीत की तो उनका दर्द छलक पड़ा। ज्यादातर बच्चे ऐसे थे जो पढ़ना-लिखना और घर लौटना चाहते हैं, लेकिन बुरी संगत और खराब आर्थिक स्थिति की वजह से वे सपनों को पूरा नहीं कर सकते।
इनमें से तीन बच्चे परिवार वालों के पास चले गए हैं। पांच बच्चों को वसुंधरा के एक शेल्टर होम में पहुंचा दिया गया है। जबकि 10 साल से कम उम्र के दो बच्चों को प्रेरणा सेवा संस्थान ने कविनगर में अपने शेल्टर होम में रखा है।
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कई दिन बाद खाया भरपेट खाना
रेस्क्यू किए गए बच्चों को जीआरपी थाने लाया गया तो पहली बार उन्हें खूब तवज्जो मिली। जीआरपी एसएसआई ने उन्हें बाहर से मंगाकर खाना खिलाया। एनजीओ पदाधिकारियों ने टॉफी और बिस्किट दिए। बच्चे खुश नजर आए।
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मेडिकल कराकर भेजा शेल्टर होम
बच्चों को रेस्क्यू करने के बाद प्रेरणा संस्थान ने जीआरपी की जीडी में दर्ज कराया और मेडिकल कराने के बाद उन्हें शेल्टर होम भेज दिया गया। सस्थान के पदाधिकारियों ने इसकी सूचना मजिस्ट्रेट को दे दी है। अब सोमवार को सभी बच्चों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।