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देखिए, नए साल की मस्ती के नाम पर खेला जा रहा कैसा गंदा खेल!

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गुड़गांव के रामपुर मानेसर से नौंरगपुर सड़क पर अरावली की गोद में तावडू क्षेत्र में कुछ फॉर्म हाउस रेव पार्टी के आयोजन का गढ़ बनते जा रहे हैं। इनमें दिल्ली-एनसीआर समेत देश के अन्य राज्यों के युवक-युवतियां शामिल भी होते हैं।
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बीते साल 25 दिसंबर क्रिसमस की रात तावडू के बिस्सर अकबरपुर क्षेत्र के एक फॉर्म हाउस में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने गुड़गांव व तावडू पुलिस के साथ एक रेव पार्टी का पर्दाफाश किया था। पार्टी में 44 युवक-युवतियों को नशे की हालत में पकड़ा था।

25 को क्रिसमस का त्योहार है और नया साल भी कुछ ही दिनों में आने वाला है। इसको देखते हुए रेव पार्टी के आयोजक ऐसी वीरान और गुमनाम जगहों की फिराक में हैं, ताकि नशे का कारोबार करके लाखों कमा सकें।
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वहीं हाई प्रोफाइल युवा भी ऐसी पार्टियों का लुत्फ उठाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। क्षेत्र बात करें तो यहां आज भी ऐसे सैकड़ों फार्म हाउस हैं, जिनके मालिकों के बारे में स्थानीय ग्रामीणों को कुछ नहीं पता। वहीं पुलिस के पास भी कोई जानकारी नहीं है।

रंगे हाथ दबोचे गए थे 44 लड़के-लड़कियां

बीते साल 25 दिसंबर की आधी रात 44 युवक-युवतियों को दिल्ली और गुडगांव पुलिस ने तावडू क्षेत्र के एक फॉर्म हाउस में रेव पार्टी करते हुए नशे की हालत में काबू किया था।

करीबन 55 युवक युवतियां अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले थे। पार्टी का आयोजन सोशल साइट के माध्यम से किया गया था। दिल्ली की नार्कोटिक्स की टीम ने इस पार्टी का पर्दाफाश किया था।

गांव बिस्सर के समाजसेवी राजेश पटेल का कहना है कि तावडू क्षेत्र में ऐसे कई फार्म हाउस हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रेव पार्टियों के आयोजन से स्थानीय युवाओं और लोगों के जीवन पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
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'पुलिस प्रशासन के लिए शर्म की बात'

समाजसेवी अतर अली गांव खोरी का कहना है कि ऐसी पार्टी युवाओं को नशे की दुनिया में धकेल रही हैं। पुलिस को ऐसे आयोजनों पर निगरानी रखनी होगी।

अधिवक्ता दीपक सतीजा तावडू का कहना है कि भारतीय कानून किसी भी सूरत में नशे के कारोबार या इसके सेवन की इजाजत नहीं देता।

अगर किसी फार्म हाउस में ऐसी गतिविधियां आयोजित होती हैं, तो यह पुलिस और प्रशासन के लिए शर्म की बात है। सरकार और आम लोगों को ऐसे आयोजनों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
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