नोटबंदी का प्रभाव धार्मिक स्थलों की अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ा है, इसका पता लगाने के लिए बृहस्पतिवार को सेक्टर-61 स्थिति प्रसिद्ध र्साइं मंदिर का जायजा लिया गया। (सभी फोटोः लाल सिंह/अमर उजाला)
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स्वाइप मशीन और चेक के जरिये दान ले रहे हैं
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साईं मंदिर के स्वाइप मशीन को दिखाते कर्मी
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर प्रबंधन ने माना कि शुरूआत में दिक्कत हुई थी, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो रही है। पेटीएम, स्वाइप मशीन और चेक से भी दान मिलना शुरू हो गया है। काफी भक्त ऐसे भी हैं, जो नए नोट दान कर रहे हैं।
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साईं मंदिर में दान देते भक्त
- फोटो : अमर उजाला
सेक्टर- 61 के साईं मंदिर के सचिव आरके शर्मा का कहना कि है 500 और 1000 के नोट बंद होने का असर मंदिराें पर भी पड़ा। चढ़ावे में पचास प्रतिशत की कमी आ गई थी। भक्तों की संख्या भी आधी हो गई थी।
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साईं मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के बाद हमने भी पुराने नोट लेना बंद कर दिया और स्वाइप मशीन और चेक के जरिये दान ले रहे हैं। शुरुआती दिनों में परेशानी हुई थी पर अब यहां की स्थिति सामान्य हो गई है।
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साईं मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
वही, परिवार के साथ मंदिर में आये भक्त आजाद ने बताया की उन्हें कोई भी असुविधा नहीं हुई। बस खुल्ले पैसों के कारण पत्नी ने थोड़ा फूलमाला लेना कम कर दिया है। रही दान की बात तो भगवान ने मांगा तो है नहीं। जो सुविधा से हो, उतना दे दीजिए । उन्होंने बताया कि लोग भंडारे कम कर रहे हैं, इसलिए मंदिर में भिखारियों की संख्या कम है।
परिवार के साथ मंदिर आए आरएन सिंह का कहना है कि भगवान के दरबार में क्या परेशानी। यहां तो दो हजार के चेंज भी आराम से मिला रहा है। जिसके पास फुटकर पैसा नही है, वो यहां बदलवाकर फूलमाला, प्रसाद खरीद सकता है। बस पैसे की वजह से थोड़ा मंदिर में पहले की अपेक्षा भीड़ कम दिख रही है। धीरे-धीरे संख्या में सुधार भी हो रहा है।