दनकौर में लुटेरों को गिरफ्तार कराने की मांग पर दलित परिवार के निर्वस्त्र प्रदर्शन को पुलिस ने गलत बताया है। जिन लोगों के खिलाफ लूट का मामला दर्ज किया गया था उन्हें भी क्लीन चिट दे दी है।
पुलिस का दावा है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी उससे दलित परिवार का जमीनी विवाद है। पुलिस ने दलित परिवार से हुई लूट का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है।
एसपी देहात संजय सिंह और सीओ अजय कुमार ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में कहा कि निर्वस्त्र प्रदर्शन को लेकर दनकौर पुलिस ने तीन महिलाओं समेत पांच लोगों को कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जेल भेज दिया था।
जांच की तो मामला कुछ और ही निकला
परिवार को जेल से रिहा कराने के लिए दलित समाज के लोगों ने प्रदर्शन किए थे। डीएम के निर्देश पर ग्रेटर नोएडा थाने की इंस्पेक्टर लक्ष्मी चौहान ने जांच की तो मामला कुछ और ही निकला।
इसमें महिलाओं को दोषमुक्त करते हुए सभी आरोप निरस्त कर दिए थे और उनको जमानत मिल गई थी। लूटे हुए मोबाइल को पुलिस ने सर्विलांस पर लगाया था तो इनमें से एक फोन से कॉल की गई।
उसी आधार पर बृहस्पतिवार रात को पुलिस ने लूट करने वाले दो आरोपियों को उनके घर से गिरफ्तार किया। लूटे हुए रुपये 850 नहीं थे, बल्कि 120 रुपये थे।
जमीनी विवाद सुलझाने के लिए दर्ज कराई थी लूट की रिपोर्ट
पुलिस ने बिलासपुर के कांग्रेसी नेता/नगर अध्यक्ष सलीम कुरैशी के बेटे मोसीन व शकील के बेटे दानिश को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों ने मीडिया के समक्ष कबूल किया कि उन्होंने उक्त लोगों के साथ लूट की थी जबकि तीसरा आरोपी आरिफ है जो लूट के मामलों में जेल जा चुका है और वह अभी फरार है।
पुलिस ने बताया कि पीड़ित परिवार ने जमीनी विवाद का मामला निपटाने के लिए ही महावीर आदि पर लूट की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जेल में बंद दलित परिवार के मुखिया की ओर से परिजनों ने अभी उसकी जमानत के लिए अर्जी नहीं डाली है।
जांच अधिकारी लक्ष्मी चौहान ने बताया कि परिवार के दो लोग जेल में हैं और अभी उनकी ओर से जमानत की अर्जी नहीं डाली गई है।