पार्टी जैसे-जैसे अपनी मुसीबतों से पीछा छुड़ाने की कोशिशों में जुटी है तो वहीं वहीं दूसरी ओर कोई ना कोई नई मुसीबत पैदा होती जा रही है।
विवादों के अंत के लिए पार्टी ने अभी बागियों से किनारा किया ही था कि एक नई परेशानी 'आप' के लिए खड़ी हो गई है। इस बार पार्टी की नई लोकपाल समिति में शामिल किए गए राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य ने ही पार्टी की कार्यप्रणालि पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
पार्टी पर सवाल उठाने वाले राकेश सिन्हा पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं, और नई लोकपाल समिति में भी शामिल किए गए हैं। सिन्हां ने पार्टी के आंतरिक लोकपाल को हटाने के फैसले पर आपत्ति दर्ज की है।
क्या कहा राकेश सिन्हां ने जिससे बढ़ी पार्टी की मुसीबत
सूत्रों के मुताबिक सिन्हां का मानना है कि आंतरिक लोकपाल को पार्टी से हटाए जाने का तरीका सही नहीं था, जिससे उनका अपमान हुआ है।
राकेश सिन्हां ने यहां तक कह दिया है कि पार्टी अपने आदर्शों से भटकती हुई नजर आ रही है। आप की परेशानियां यहीं खत्म नहीं होतीं, क्योंकि सिन्हां की आपत्तियां खत्म नहीं हुई हैं।
राकेश सिन्हां बोले कि पार्टी जिस सोच के साथ इस वक्त काम कर रही है उस सोच के साथ उसे नहीं बनाया गया था। ऐसे पुराने लोकपाल को हटाकर नए लोकपाल को बनाने वाली आप अब अपने नए लोकपाल समिति में शामिल राजेश सिन्हां के सवालों से जूझती नजर आएगी।
हटाए जाने पर क्या बोले थे AAP के आंतरिक लोकपाल
आम आदमी पार्टी के आंतरिक लोकपाल पद से रामदास को हटा दिया गया। ऐसे में हटाए गए आंतरिक लोकपाल का कहना था कि उन्हें इस बात से बेहद ही निराश होना पड़ा है कि पार्टी ने उन्हें अपने फैसले के बारे में बताए बिना ही इस तरह का कदम उठा लिया।
एडमिरल रामदास ने ये भी कहा कि पिछले महीने जब पार्टी की अनौपचारिक बैठक हुई थी तो उनसे ये आग्रह किया गया था कि वो पांच साल और इस पद पर बने रहे हैं।
रामदास ने अपने बयान में कहा था कि उन्हें सबसे ज्यादा दुख और आश्चर्य तब हुआ जब मुझे ये खबर पार्टी से नहीं बल्कि मीडिया से मिली कि पार्टी को अब मेरी आवश्यकता नहीं है और अब वो मेरी सेवाएं नहीं चाहते।
एडमिरल रामदास ने ये भी कहा कि मैं बेहद निराश हूं कि पद से हटाने से पहले पार्टी ने मेरी राय भी नहीं ली। मुझे अब भी उनके फोन का इंतजार है।