देशभर से लापता बच्चों की पहचान और उनका डाटा रखने के लिए साफ्टवेयर बनाया जा रहा है। इसे बनाने में निजी कंपनियों की मदद ली जाएगी। केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी है।
अदालत ने हाल ही में राजधानी से लापता हो रहे बच्चों के मुद्दे पर सरकार को ऐसा सॉफ्टवेयर बनाने की सलाह दी थी, जिससे बच्चों के चेहरे व अन्य जानकारी का मिलान कम समय में आसानी से हो सके।
इससे बच्चे मिलने के बाद तुंरत उसके परिजनों के बारे में पता लगाया जा सकेगा। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना व न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में बदलाव के बाद अब लापता बच्चों के मद्देनजर स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसिजर (एसओपी) में भी बदलाव किया गया है।
एक्ट में बदलाव के बाद अब किसी व्यक्ति, पुलिसकर्मी, नर्सिंग होम आदि को लापता बच्चा मिलने पर संबंधित सभी एजेंसियों को बताना अनिवार्य है। एसओपी के तहत लापता बच्चों की तलाश, तलाश में जुटे पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है।