नए सेमेस्टर की कक्षाएं आज से शुरू हो जाएंगी। प्रशासन ने फैकल्टी सदस्यों को विश्वविद्यालय में स्थिति सामान्य बनाने के लिए उठाए गए कदमों के विषय में भी बताया है। प्रशासन के अनुसार शिक्षक खुश हैं कि कक्षाएं शुरू होने जा रही हैं। प्रशासन अब सकारात्मक रूप से आगे की ओर देख रहा है।
इस बीच, पूर्व पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने जेएनयू हिंसा मामले को स्थानीय पुलिस की बड़ी लापरवाही बताया है। उनका कहना है कि किसी भी आपराधिक घटना की जानकारी होते ही घटनास्थल पर जाने के लिए पुलिस को किसी अनुमति की जरूरत नहीं होती। पुलिस को यूनिवर्सिटी वीसी के निर्देश का इंतजार नहीं करना चाहिए था। वक्त रहते पुलिस हस्तक्षेप करती तो शायद नकाबपोश हमलावरों को पकड़ा जा सकता था।
नीरज कुमार ने बताया कि उनके कार्यकाल में जेएनयू परिसर में हालात बिगड़ने की सूचना प्राप्त हुई थी। इसके बाद उन्होंने वक्त रहते हालात से निपटने के लिए पुलिस के साथ-साथ क्राइम ब्रांच को भी लगा दिया था। इसकी वजह से हालात को वक्त रहते काबू में कर लिया गया। नीरज कुमार ने आगे कहा कि 5 जनवरी को जेएनयू परिसर में हुई हिंसा में पुलिस की लापरवाही साफ उजागर होती है।
उन्होंने कहा कि पुलिस को बवाल की जानकारी के बाद वीसी के निर्देश का इंतजार नहीं करना चाहिए था। नतीजतन, नकाबपोश बदमाशों ने हॉस्टल में कई घंटों तक उत्पात मचाने के साथ-साथ 34 लोगों को लोहे की रॉड व डंडों से घायल कर दिया।
कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नीरज कुमार कहते हैँ कि जामिया मामले में भी पुलिस की गलती उजागर हुई थी। पुलिस ने जामिया में उपद्रवियों की तलाश के नाम पर कथित रूप से हिंसा फैलाई थी। उनका कहना है कि जामिया में पुलिस बगैर किसी अनुमति के प्रवेश कर गई, लेकिन जेएनयू में हिंसा होती रही और पुलिस निर्देश का बहाना बनाकर हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
उन्होंने कहा कि शायद जेएनयू हिंसा में शामिल लोग एक राजनीतिक पार्टी के थे, इस वजह से पुलिस कार्रवाई से बचती रही। नीरज कुमार निर्भया के साथ हुई वारदात के वक्त पुलिस आयुक्त थे।
आइशी घोष से आज पूछताछ कर सकती है दिल्ली पुलिस
जेएनयू हिंसा मामले में छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष और पदाधिकारियों से सोमवार को पूछताछ हो सकती है। दिल्ली पुलिस ने नोटिस देकर आइशी को पूछताछ के लिए उपलब्ध रहने के लिए कहा है। पुलिस ने यह भी कहा कि अगर वे हॉस्टल में उपलब्ध होंगी तो महिला पुलिस अफसर उनसे वहां पूछताछ कर सकती है। दूसरी तरफ, एसआईटी ने कैंपस हिंसा में शामिल सात अन्य लोगों की पहचान की है। सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो और चैटिंग के स्क्रीन शॉट्स के जरिये इनकी पहचान की गई है।
अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ प्रोफेसरों, छात्रों और गार्डों से शनिवार को पूछताछ की गई। इनमें तीन प्रोफेसर, चार सिक्योरिटी गार्ड व तीन घायल शामिल हैं। ये सभी हिंसा के पीड़ित हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अभी किसी भी आरोपी से पूछताछ नहीं हुई है। एसआईटी सोमवार से आरोपियों से पूछताछ शुरू करेगी। इसके लिए रविवार को आरोपियों को नोटिस दिए गए।
पुलिस ने जिन नौ आरोपियों के नामों का खुलासा कर उनके फोटो जारी किए थे, उन सभी को पूछताछ के लिए नोटिस दिया जा चुका है। उधर, यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट के जिन 37 लोगों की पहचान हुई है, उन्हें भी नोटिस देना शुरू कर दिया गया है। उन्हें अगले हफ्ते पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इन सभी को सीआरपीसी की धारा 160 के तहत नोटिस भेजे गए हैं।
वामपंथी विचारधारा से जुड़े जिन 7 लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें तीन छात्राएं हैं। सभी को पूछताछ के लिए उपलब्ध रहने के लिए अलग-अलग समय दिया गया है। नोटिस के बावजूद पूछताछ में शामिल नहीं होने वालों को दोबारा नोटिस भेजा जाएगा।
उधर, एसआईटी ने रविवार को न तो किसी आरोपी और न ही किसी पीड़ित से पूछताछ की। एसआईटी सूत्रों के अनुसार, रविवार को आरोपियों को नोटिस भिजवाए गए। जिन लोगों के पते मिल गए, उनको स्पीड पोस्ट से नोटिस भिजवा दिया गया है। अन्य आरोपियों के पते हासिल किए जा रहे हैं।