जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में मनुस्मृति के पन्ने जलाने के बाद एक नया पोस्टर विवाद शुरू हो गया है। कैंपस में से नो टू होली नाम से पोस्टर लगा है, जोकि फ्लैम्स ऑफ रिसिस्टेंस (फॉर ) की ओर से लगाया गया है।
पोस्टर में लिखा है कि प्रह्लाद को बचाने के लिए होलिका का आग में जलने की कहानी झुठी है। जबकि वास्तविकता यह है कि आर्य मनु को खुश करने के लिए पहले दलित महिलाओं का रेप करते थे और बाद में उनको सामुहिक आग लगाकर जला देते थे।
वहीं, व्हाटसऐप पर भी प्रह्लाद को होलिका का रेप करने और जलाने का दोषी देने वाली जानकारियां सांझी की जा रही हैं। जेएनयू कैंपस में शनिवार को सामने आए पोस्टर यूं तो होली के दिन लगाए गए थे, लेकिन जानकारी बाहर नहीं आ सकी।
हॉस्टल, कैंटीन, ढाबा से लेकर मार्केट में हर जगह यह पोस्टर लगे हुए हैं। हालांकि पोस्टर में किसी भी संगठन का नाम नहीं है, लेकिन दलित वर्ग से संबंरति छात्र इस पोस्टर को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।
पोस्टर में लिखा है कि आर्य दलितों को घृणा की नजर से देखते थे। होली के त्योहार में दलित महिलाओं का यौन शोषण होता था, जिसे वे एक जश्न के रूप में मनाते थे। इसके बाद इन दलित महिलाओं को जला दिया जाता था।