आम आदमी पार्टी एक-एक कर अपने वादों को अमली-जामा पहनाने में लगी है। अब सड़क पर फैले बाजार से अपनी जिंदगी का गुजर करने वाले लोगों के लिए सरकार ने जहां राहत दी है तो वहीं दिल्ली की अवैध कॉलोनियों के सूरत को बदलने का भी निश्चय कर लिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधार बनाकार स्थानीय निकाय के अतिरिक्त सचिव मीणा ने एक आदेश जारी किया है जिसमें साफ किया गया है कि कि जो स्ट्रीट वेंडर या हॉकर हैं,उन्हें रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी होने तक बिजनेस करने दिया जाए,और उन्हें नहीं हटाया जाएगा। इस आदेश में ये भी बताया गया है कि कोई नया वेंडर या हॉकर भी सामने नहीं आए।
शहरी विकास विभाग की तरफ से जारी आदेश में लिखा गया है कि मुख्यमंत्री की पब्लिक मीटिंग में हॉकर्स ने बताया है कि उन्हें कारोबार वाली जगह से हटाया जा रहा है। ऐसे में उन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। केजरीवाल के पास शिकायत लेकर पहुंचे वेंडर्स ने ये भी कहा कि उन्हें बिना किसी भी पूर्व सूचना के जबरदस्ती उनकी कारोबारी जगह से हटाया जा रहा है।
अब तक लागू नहीं हो सका अब क्या होगा बदलाव
आपको बता दें कि दिल्ली में स्ट्रीट वेंडर्स के लिए रजिस्ट्रेशन के लिए कानून तो है लेकिन 5 लाख स्ट्रीट वेंडर यानि रेहड़-पटरी वालों में से महज 50 हजार लोग ही पंजीकृत है। इस वजह से स्थानीय निकायों और दिल्ली पुलिस की वजह से उन्हें कई बार प्रताड़ना भी झेलनी पड़ती है।
इससे पहले केन्द्र सरकार इस मामले में पहल तो कर चुकी है,लेकिन उसका कोई हल नहीं निकल सका। इससे पहले स्ट्रीट वेंडर बिल,2012 पर राज्यों से 2013 में सुझाव मांगे थे। जिस पर शीला दीक्षित की अगुवाई वाली सरकार ने उस बिल को स्वीकार करने का फैसला किया था। बताते हैं कि मई,2014 से कानून है,लेकिन इसे लागू अभी तक नहीं किया जा सका है। स्ट्रीट वेंडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने पिछले महीने इस मामले में उपराज्यपाल नजीब जंग से भी मुलाकात की थी।
इस कानून के लागू होने से जगह-जगह राह रोकने वाले वेंडर्स की परेशानी भी दूर होगी। क्योंकि लाइसेंस निश्चित जगह व समय के लिए दिए जाएंगे। कानून पास होने पर रेहड़ी-पटरी वालों को स्थानीय निकाय और पुलिसिया डंडे के साथ-साथ रिश्वतखोरी से भी बचाएगा।
इस ब्लूप्रिंट से केजरीवाल बदलेंगे सूरत-ए-हाल
केजरीवाल सरकार इस फैसले के असर 1639 अवैध कॉलोनियों की सूरत बदलना चाहती ह। इसके लिए दिल्ली अरबन आर्ट कमीशन ने एक ब्लूप्रिंट तैयार किया है।
इस ब्लूप्रिंट के लिए दक्षिणी पश्चिमी दिल्ली की कॉलोनी को मॉडल कॉलोनी पर स्टडी की जा रही है जिसके बाद इसे दिल्ली की अन्य कॉलोनियों में बेहतरी के मॉडल के रूप में तैयार किया जाना है। अन्य सुविधाओं जैसे नये घरों के निर्माण,सड़क,परिवहन और अन्य सुविधाओं को कार्यरूप देने से पहले उसका एक स्वरूप विकसित किया जा रहा है।
इस ब्लूप्रिंट के मुताबिक इकोपार्क से लेकर प्राइमरी सेकेन्डरी,स्कूल,स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स विकसित किए जाने हैं। फिलहाल अभी ये ब्लूप्रिन्ट आयानगर के लिए तैयार किया गया है, लेकिन इस दिल्ली की अन्य कॉलोनिया के लिए आधार के तौर पर विकसित किया जा रहा है। डेढ़ लाख की जनसंख्या वाले इस इलाके में महज 12 प्राइमरी स्कूल ही हैं। वहीं 14 सीनियर सेकेन्डरी स्कूल हैं,जो कि राजधानी के तौर पर बेहतर स्थिति नहीं है।