हरियाणा के परिवहन आयुक्त के आदेश ने प्रदेश के ट्रांसपोर्टरों की नींद उड़ा दी है। नए आदेश के तहत कॉमर्शियल वाहनों में नए सिरे से स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही वाहनों में ऑटो डिपर भी लगाने होंगे।
नए नियम को लेकर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा किया है, क्योंकि स्पीड गवर्नर लगाने का जिम्मा उन कंपनियों को सौंपा गया है जिन्होंने तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में घटिया क्वालिटी का इस्तेमाल किया था। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक फरीदाबाद जिले के 60 हजार कॉमर्शियल वाहनों में स्पीड गवर्नर और ऑटो डिपर लगाने के लिए ट्रांसपोर्टरों को 75 करोड़ रुपये अधिक खर्च करने होंगे।
कॉमर्शियल वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का नियम पहली बार 2011 में लागू किया गया था। हालांकि, इसके बाद स्पीड गवर्नर लगाने की समयावधि बढ़ती रही। पहले 31 मार्च 2016 तक सभी वाहनों में स्पीड गवर्नर लगने थे।
ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने ने दिल्ली में भूतल परिवहन मंत्रालय के समक्ष मुद्दा उठाया, तो समयावधि बढ़ाकर 31 जुलाई 2016 कर दी गई। हालांकि, इससे पहले तत्कालीन सरकार ने निजी कंपनियों को स्पीड गवर्नर लगाने का काम सौंप दिया।
ढ़ाई से तीन हजार रुपये में स्पीड गवर्नर लगाए भी गए, लेकिन गुणवत्ता खराब होने के कारण अधिकांश वाहन मालिकों ने इनकी खराबी की शिकायत की। ऑल फरीदाबाद ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महासचिव सुभाष कौशिक के मुताबिक तत्कालीन सरकार ने स्पीड गवर्नर लगाने का काम जिन कंपनियों को सौंपा था, मौजूदा सरकार ने फिर से उनमें से एक कंपनी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। जो स्पीड गवर्नर पहले ढ़ाई से तीन हजार में लगाए गए थे वही अब 8500 रुपये में लगाए जाएंगे।
इतना ही नहीं ड्राइवर साइड फ्रंट शीशे के पास हाईबीम लाइट मोड के लिए ऑटो डिपर लगाने की अनिवार्यता भी लागू कर दी है। जो ऑटो डिपर बाजार में 600 रुपये का लगता है, उसे सरकार की निर्धारित कंपनी से 3999 रुपये में खरीदना होगा जबकि 500 रुपये इंस्टोलेशन चार्ज देना होगा। कौशिक ने बताया कि एक वाहन पर करीब 13 हजार रुपये खर्च करने होंगे। ऐसे में 60 हजार वाहनों पर खर्च का आंकड़ा करीब 75 करोड़ रुपये होगा। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि सरकार स्पीड गवर्नर या ऑटो डिपर की गुणवत्ता के आधार पर बाजार से लगवाने की मंजूरी दे।