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Metro: सात दिन में तय होगा सेक्टर-142 से बॉटेनिकल गार्डन तक नया मेट्रो रूट

Fri, 30 Sep 2022 04:31 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नोएडा।

सार

Metro:  सेक्टर-142 से बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन का कॉरिडोर करीब 11.5 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें छह स्टेशन तैयार किए जाएंगे। परियोजना पर करीब दो हजार करोड़ रुपये का खर्च होगा। 
 
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मेट्रो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड की एक्वा लाइन के सेक्टर-142 मेट्रो स्टेशन से बॉटेनिकल गार्डन तक प्रस्तावित कॉरिडोर के रूट पर फैसला सात दिनों में हो जाएगा। इसके बाद डीपीआर को अगली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा और नई लाइन पर काम कराने की प्रक्रिया शुरू होगी। 

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इस बाबत स्थानीय निवासियों से दो चरणों में बातचीत की गई और सुझाव लिए गए हैं। एक्वा लाइन के नए कॉरिडोर को लेकर एनएमआरसी की ओर से सबसे पहले एक्सप्रेसवे के समानांतर रूट तय किया गया था, लेकिन बाद में स्थानीय निवासियों ने ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए दो और विकल्पों पर सुझाव दिए थे। 

एनएमआरसी ने स्थानीय निवासियों से दो चरणों में बातचीत की। पहले चरण में बालक इंटर कॉलेज सेक्टर-91 से बॉटेनिकल गार्डन के रूट पर फैसला किया गया। हालांकि, बृहस्पतिवार को एक और बैठक हुई। इसमें अलग-अलग सेक्टरों व सोसाइटियों के प्रतिनिधियों की एनएमआरसी की एमडी रितु माहेश्वरी की वार्ता हुई। इसमें सेक्टर-130, नोवरा, जेपी विशटाउन, सेक्टर-128, सुल्तानपुर गांव, सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता, नगली गांव समेत कई स्थानों के 25 प्रतिनिधियों ने मंथन किया। 
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बैठक में सेक्टर-91 से बॉटेनिकल गार्डन वाले रूट पर फैसला हुआ। उनका कहना है कि यह रूट ज्यादा फायदेमंद है और इससे सभी को फायदा होगा। इस रूट पर कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को भी आसानी होगी। 

11.5 किमी लंबा होगा प्रस्तावित कॉरिडोर
सेक्टर-142 से बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन का कॉरिडोर करीब 11.5 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें छह स्टेशन तैयार किए जाएंगे। परियोजना पर करीब दो हजार करोड़ रुपये का खर्च होगा। 

अब ऐसे चलेगी प्रक्रिया
अब इन दो रूटों का प्रस्ताव दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएमआरसी) को दिया जाएगा। डीएमआरसी की ओर से सात दिनों में इस रूट पर सुझाव दिया जाएगा। इसके बाद डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट बोर्ड बैठक में रखी जाएगी। बोर्ड बैठक से पास होने के बाद यह यूपी शासन के पास जाएगी। शासन से इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से डीपीआर को मंजूरी देने के बाद टेंडर निकलेगा।  

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