विदेश में पढ़ाई और शोध के लिए चयन में सीजीपीए, उपस्थिति व साक्षात्कार को मिलेगा महत्व
पीएचडी शोधार्थियों के लिए रिसर्च प्रपोजल अनिवार्य
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इरास्मस मोबिलिटी कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए चयन प्रक्रिया और पात्रता के नए नियम तय किए हैं। इसके तहत विभिन्न श्रेणियों के आवेदकों के लिए योग्यता, चयन समिति और मूल्यांकन के मानक निर्धारित किए गए हैं।
छात्रों का चयन शैक्षणिक रिकॉर्ड, साक्षात्कार और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर होगा। पीएचडी शोधार्थियों के चयन में शोध प्रस्ताव और विदेशी विश्वविद्यालय में शोध पर्यवेक्षक की उपलब्धता को विशेष महत्व दिया जाएगा। इरास्मस कार्यक्रम विदेश में पढ़ाई, शोध और अकादमिक अनुभव हासिल करने का एक विनिमय कार्यक्रम है। आवेदन करने वाले छात्र का दिल्ली विश्वविद्यालय में पंजीकृत होना जरूरी है। छात्र के पिछले सेमेस्टर में कोई पेपर दोबारा देने की स्थिति में नहीं होना चाहिए। न्यूनतम 66.67 प्रतिशत उपस्थिति, आवश्यक भाषा दक्षता और कम से कम दो साल की वैधता वाला पासपोर्ट भी जरूरी है। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के छात्रों के लिए न्यूनतम 7.5 सीजीपीए निर्धारित है। एससी-एसटी वर्ग के छात्रों के लिए न्यूनतम 6.5 सीजीपीए आवश्यक है। छात्र ने पहले इस कार्यक्रम का लाभ नहीं लिया होना चाहिए।
छात्रों के चयन के मानक
छात्रों के चयन में शैक्षणिक रिकॉर्ड को 50 प्रतिशत भार मिलेगा। साक्षात्कार को 30 प्रतिशत भार दिया जाएगा। उद्देश्य विवरण, संकाय की सिफारिश, विभाग में शोध एवं योगदान और उपस्थिति को पांच-पांच प्रतिशत भार मिलेगा। वही पीएचडी शोधार्थी आवेदन कर सकेंगे जिन्होंने अपना पाठ्यक्रम कार्य पूरा कर लिया हो। उन्हें अकादमिक पर्यवेक्षक की सिफारिश, आवश्यक भाषा दक्षता और विदेशी विश्वविद्यालय में अस्थायी अकादमिक पर्यवेक्षक का स्वीकृति पत्र देना होगा। पीएचडी छात्रों के चयन में शोध प्रस्ताव को 40 प्रतिशत और साक्षात्कार को 30 प्रतिशत भार मिलेगा। यूजीसी-सीएसआईआर नेट या जेआरएफ को 10 प्रतिशत, विदेशी पर्यवेक्षक की विशेषज्ञता को 20 प्रतिशत भार दिया जाएगा। सूचीबद्ध पत्रिका में प्रकाशित शोध पत्रों वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिलेगी।