करिकुलम फ्रेमवर्क एंड क्रेडिट सिस्टम फॉर द फोर ईयर अंडरग्रैजुएट प्रोग्राम का ड्राफ्ट सुझावों के लिए पब्लिक डोमेन में रखा है। शिक्षकों ने इसे उधार का फ्रेमवर्क का उपनाम दिया है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत जब उच्च शिक्षण संस्थानों में स्नातक और स्नातकोत्तर प्रोग्राम में पढ़ाई का ढांचा बदल रहा है तो वह भी विदेशी विश्वविद्यालयों की नकल से तैयार किया गया है।
देश के सभी विश्वविद्यालयों में आगामी शैक्षणिक सत्र से शुरू हो रहे चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम, पाठ्यक्रम और क्रेडिट सिस्टम का ड्राफ्ट विवादों में आ गया है। दरअसल शिक्षक संगठनों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को इस करिकुलम फ्रेमवर्क एंड क्रेडिट सिस्टम फॉर द फोर ईयर अंडरग्रैजुएट प्रोग्राम के ड्राफ्ट पर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करवाई हैं।
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इन आपत्तियों में इसमें लिखा है कि इस मसौदे में विदेशी विश्वविद्यालयों की नकल यानी कॉपी पेस्ट या प्लेगरिज्म है। इसके अलावा संगठनों का आरोप है कि इसमें यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन और यूनिवर्सिटी ऑफ ऐरिजोना से पाठ्यक्रम, कोर्स और मल्टीडिस्पलनेरी को कॉपी किया गया है।
खास बात यह है कि शिक्षक संगठन ने चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम में ऑनर्स और रिसर्च के लिए पहले तीन साल सामान्य कोर्स की पढ़ाई करवाने और वर्ष 2013 में दिल्ली विश्वविद्यालय में शुरू हुए चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम को पहले बंद और अब दोबारा वैसे ही शुरू करने पर भी सवाल उठाए हैं। इसके बाद यूजीसी ने ड्रॉफ्ट को उच्चस्तरीय समिति को वापस भेज दिया है। समिति अब दोबारा आरोपों की जांच करके अपनी रिपोर्ट के साथ फाइनल ड्रॉफ्ट बनाकर देगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय के डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट ने यूजीसी को अपनी आपत्तियां भेजी हैं। इसमें लिखा है कि आयोग ने पहले नेशनल हायर एजुकेशन क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क(एनएचईक्यूएफ) का ड्रॉफ्ट बनाया। इसके बाद करिकुलम फ्रेमवर्क एंड क्रेडिट सिस्टम फॉर द फोर ईयर अंडरग्रैजुएट प्रोग्राम का ड्राफ्ट सुझावों के लिए पब्लिक डोमेन में रखा है। शिक्षकों ने इसे उधार का फ्रेमवर्क का उपनाम दिया है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत जब उच्च शिक्षण संस्थानों में स्नातक और स्नातकोत्तर प्रोग्राम में पढ़ाई का ढांचा बदल रहा है तो वह भी विदेशी विश्वविद्यालयों की नकल से तैयार किया गया है।
ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति को जांच के लिए भेजा
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संज्ञान में यह मामला आया है। समिति को दोबारा इस ड्राफ्ट को जांचने के लिए भेज दिया गया है। उच्चस्तरीय समिति को जल्द से जल्द शिक्षक संगठनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करके रिपोर्ट बनाकर देने को कहा है, ताकि उसकी सही जानकारी मिल सके। यह ड्राफ्ट था। उच्चस्तरीय समिति अपनी रिपोर्ट देगी, उसके बाद फाइनल मसौदा तैयार होगा।- प्रो. रजनीश जैन, सचिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग