दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन के पुलबंगश मेट्रो स्टेशन को इंटरचेंज में तब्दील किया जा रहा है। इससे यात्रियों को रेड और मैजेंटा लाइन के बीच मेट्रो बदलने की सुविधा होगी। इसके लिए मौजूदा मेट्रो स्टेशन को आरके आश्रम-जनकपुरी (पश्चिम) कॉरिडोर पर नए मेट्रो स्टेशन से जोड़ा जाएगा। यह उत्तरी दिल्ली का पांचवां इंटरचेंज स्टेशन होगा। इसके तैयार होने से उत्तरी दिल्ली में कनेक्टिविटी काफी बढ़ जाएगी। इंटरचेंज की सुविधा से पहाड़गंज, नबी करीम, सदर बाजार, घंटा घर सहित आसपास की घनी आबादी वाले क्षेत्रों से आवागमन में सहूलियत होगी।
मेट्रो फेज-4 आरके आश्रम-जनकपुरी कॉरिडोर पर नए इंटरचेंज स्टेशन के बनने से यात्रियों को रेड लाइन पर शहीद स्थल (नया बस अड्डा) और रिठाला के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक और वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगा। इससे रेड लाइन पर भीड़भाड़ भी कम होगी। नए भूमिगत स्टेशन का निर्माण मौजूदा एलिवेटेड स्टेशन के नजदीक रोशनआरा रोड पर 19 मीटर की गहराई पर किया जाएगा। इसकी लंबाई 225 मीटर होगी। यात्रियों की सुविधा के लिए इस स्टेशन में इंटरचेंज प्रवेश सहित प्रवेश और निकास के लिए तीन गेट बनाए जाएंगे। एक इंटरकनेक्शन मार्ग दो स्टेशनों को जोड़ेगा जो एक दूसरे से सटे होंगे। इस क्षेत्र में लिफ़्ट, एस्केलेटर सहित दूसरी वाणिज्यिक गतिविधियां भी होंगी।
नए इंटरचेंज स्टेशन के बनने से लोगों को सदर बाजार, कमला नगर मार्केट और घंटा घर पहुंचने में सहूलियत होगी। इन जगहों से फिलहाल मेट्रो की कनेक्टिविटी नहीं है। इससे गाजियाबाद स्थित शहीद स्थल (नया बस अड्डा) सहित पूर्वी और उत्तरी दिल्ली के क्षेत्रों के लिए सीधी कनेक्टिविटी होगी।
भीड़भाड़ वाले इलाकों से ट्रैफिक जाम की नहीं रहेगी समस्या
इस इंटरचेंज स्टेशन के बनने से कुतुब मार्ग, लाला जगन्नाथ, रोशन आरा रोड, जी.टी करनाल रोड और आसपास के व्यस्त सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या भी नहीं रहेगी। इस स्टेशन के निर्माण के लिए प्रारंभिक कार्य की शुरुआत हो चुकी है। रोशनआरा रोड पर भारी यातायात होने की वजह से स्टेशन का निर्माण चरणों में किया जाएगा।
कॉरिडोर के निर्माण की राह में चुनौतियां
सिविल इंजीनियरिंग के लिहाज से भी इस कॉरिडोर का निर्माण बेहद कठिन है। नबी करीम, घंटा घर, सदर बाजार जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से होकर मेट्रो गुजरेगी। मौजूदा हालात को देखते हुए डीएमआरसी निर्माण के क्षेत्र में अपने अनुभवों का उपयोग करेगी। पुरानी दिल्ली के इलाकों में भूमिगत निर्माण के लिए नई तकनीक का उपयोग किया जाएगा।