प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, 99 साल के पट्टे पर चल रहा डीडीयू मार्ग पर ट्रस्ट का दफ्तर, विधिक व्यक्ति के कहने पर ही शाश्वत डीड रद्द हो सकती है। जेएनएनवाईसी पदाधिकारी बोले, उसी शख्स के कहने पर केंद्र सरकार के भूमि व विकास कार्यालय ने की कार्रवाई, जिसको तीन साल पहले हटाने का निर्देश दिया था।
जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय युवा केंद्र पर शनिवार सुबह भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे भूमि और विकास विभाग के अधिकारी। दीनदयाल मार्ग पर स्थित यह इमारत सील कर दी गई है और युवा केंद्र के अधिकारी अंदर हैं।
- फोटो : अमर उजाला
राजधानी दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय युवा केंद्र (जेएनएनवाईसी) के एक हिस्से को शनिवार सुबह केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के भूमि और विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) ने बंद कर दिया है। अपनी कार्रवाई के हक में अधिकारियों ने जेएनएनवाईसी की बैठक में पारित एक प्रस्ताव का हवाला दिया है। इस पर सख्त एतराज जताते हुए जेएनएनवाईसी पदाधिकारियों का कहना है कि एलएंडडीओ ने जिस शख्स पुरुषोत्तम गोयल की तरफ से बुलाई गई बैठक में पारित प्रस्ताव पर कार्रवाई की, उसे ट्रस्ट से निकालने का आदेश तीन साल पहले खुद एलएंडडीओ ने ही दे रखा है। वहीं, हाई कोर्ट ने भी 20 जुलाई 2015 में इस पर प्रोविजनल स्टे है। इसके बावजूद एलएंडडीओ का दस्ता कार्रवाई करने पहुंचा है। ऐसे में यह कार्रवाई पूरी तरह अवैध है। ट्रस्ट का दफ्तर 99 साल की शाश्वत डीड पर डीडीयू मार्ग पर चल रहा है। डीड में बदलाव विधिक व्यक्ति की स्वीकृति के बाद ही दिया जा सकता है। अधिकारियों ने शनिवार की कार्रवाई के खिलाफ अदालत में जाने की बात कही है।
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जेएनएनवाईसी दफ्तर 1972 में 99 साल की लीज पर मिला
जेएनएनवाईसी के प्रशासनिक अधिकारी व दिल्ली इकाई के प्रमुख पंकज पांडेय का कहना है कि दीन दयाल मार्ग स्थित जेएनएनवाईसी दफ्तर 1972 में 99 साल की लीज पर मिला था। प्रवीण सिंह ऐरन 1988 से महासचिव हैं। 2014 में इनको महानिदेशक भी बना दिया गया। ट्रस्ट इनके अधीन ही संचालित होता है। इस पर इस वक्त विधिक अधिकार इनका ही है। आरोप है कि 2018 से पुरुषोत्तम गोयल नामक एक व्यक्ति ने खुद को महासचिव बताकर लगातार दावेदारी की है। अक्तूबर 2020 में भूमि व विकास कार्यालय ने गोयल का अवैध व्यक्ति बताकर इनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया था। इस पर कदम उठाते हुए ट्रस्ट ने इनको हटाकर इसकी सूचना लिखित में भूमि व विकास कार्यालय को देकर पब्लिक नोटिस जारी किया था। इसमें साफ-साफ कहा गया था कि गोयल का ट्रस्ट से कोई नाता नहीं है।
जेएनएनवाईसी को पूरा कैंपस तीन प्लॉट में
वहीं, जेएनएनवाईसी के दूसरे प्रशासनिक अधिकारी प्रवीण सिन्हा ने बताया कि जेएनएनवाईसी को पूरा कैंपस तीन प्लॉट में है। इसमें चार गेट हैं। एलएंडडीए ने शनिवार जो कार्रवाई की, उसमें एक गेट बंद कर दिया गया। यह दो प्लॉट का मेन गेट एक ही है। साथ ही बोर्ड भी हटा दिया गया है। इनका आरोप है कि जिस पुरुषोत्तम गोयल की तरफ से बुलाई गई बैठक में पारित प्रस्ताव का हवाला देकर एलएंडडीए ने कार्रवाई की है, उनका ट्रस्ट से कोई वास्ता नहीं है। उनका सवाल है कि इस तरह के शख्स के पत्र पर कैसे कार्रवाई हो सकती है। जबकि गेट बंद होने से ट्रस्ट के कर्मचारियों को काम करने में दिक्कत हो रही है। प्रवीण सिन्हा के मुताबिक, इस मामले में पहले दफ्तर सील करने के एसडीएम के आदेश पर 20 जुलाई 2015 में हाई कोर्ट ने प्रोविजनल स्टे स्टे दे रखा है। मामला अदालत में विचाराधीन है। अदालत ने इसके देख-रेख की जिम्मेदारी महानिदेशक प्रवीण सिंह ऐरन को दे रखी है।
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पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारियों ने चार में से एक गेट पर ताला लगा दिया
इससे पहले भूमि और विकास कार्यालय ने शुक्रवार को संपत्ति अधिग्रहण करने का पत्र जारी किया था। इसमें जेएनएनवाईसी की पिछले 21 नवंबर की एक बैठक में पारित प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा गया था कि ट्रस्ट की जगह का लोक हित में ली जा रही है। इसी कड़ी में शनिवार भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारियों ने चार में से एक गेट पर ताला लगा दिया। पंकज पांडेय ने बताया कि वैधानिक ट्रस्ट की कोई बैठक नहीं हुई है। जिस बैठक की बात भूमि व विकास कार्यालय कर रहा है, उसमें पुरुषोत्तम गोयल का नाम आ रहा है। जबकि खुद भूमि व विकास कार्यालय उनको ट्रस्ट से हटाने की बात तीन साल पहले दे चुका है।