अगर आप (पार्टी) को लगता था कि उनहें इस मुद्दे पर कुछ बोलना है तो उन्हें बोलना चाहिए था। यदि वह ये साबित करना चाहते थे कि उन्होंने लाभ के पद का प्रयोग नहीं किया तो उन्हें इसपर कुछ बोलना चाहिए था। अगर वो ऐसा चाहते तो हम सुनवाई के लिए तारीख भी रखते पर पार्टी ने ऐसा कुछ नहीं किया।
बता दें कि चुनाव आयोग ने शुक्रवार को अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेज दी थी जिसमें यह कहा गया था कि आप के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी जाए क्योंकि वह संसदीय सचिव के पद पर हैं और लाभ के पद का प्रयोग कर रहे हैं। जिसके बाद इस सिफारिश पर राष्ट्रपति ने भी अपनी मुहर लगा दी और आप के 20 विधायक अयोग्य घोषित हो गए।