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घिनौनी यातना ने उजागर किया भूकंप का दर्दनाक सच

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नेपाल में इस साल आई भूकंप की भयावह त्रासदी ने न केवल लाखों लोगों से उनका घर परिवार व रोजगार छीना बल्कि नेपाली युवतियों को भूकंप से भी बड़ी एक त्रासदी में धकेल दिया है।
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भूकंप की भयावहता के कारण करीब 6 महीने बाद भी नेपाल के लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। ये राहत शिविर ही देह व्यापार के धंधे में लिप्त लोगों के लिए स्वर्ग बने हुए हैं।

इसका कारण ये है कि इन राहत शिविरों में रह रही महिलाएं व युवतियां ऐसे दलालों के चक्कर में आसानी से आ जाती हैं जो उन्हें कई देशों के बड़े शहरों में नौकरी का ख्वाब दिखाते हैं।
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गुड़गांव मामले से सामने आई बड़ी हकीकत

भूकंप में अपना सब कुछ छिन जाने के बाद अपने परिवारों की तंगहाली देखकर ये नेपाली युवतियां आराम से इन मानव तस्करों के हत्थे चढ़ जाती हैं और अपनी जिंदगी तबाह कर लेती हैं।

भूकंप के बहाने देह-व्यापार चला रहे इन अपराधियों का धंधा तब सामने आया जब सोमवार की रात को गुड़गांव पुलिस ने साऊदी राजनयिकों के फ्लैट से दो नेपाली युवतियों को छुड़ाया।

इन मां-बेटी को नेपाल से नौकरी का झांसा देकर ही दिल्ली लाया गया था। जहां इन्हें सऊदी राजनयिकों को 1 लाख में बेच दिया गया और उन्होंने इन दोनों को जेद्दाह 15 दिन के लिए जेद्दाह पहुंचा दिया।
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अगर नहीं भागती नीतू तो कभी न खुलता राज

15 दिन के बाद ये वापस दिल्ली लाई गईं, जिसके बाद इन्हें गुड़गांव के एक फ्लैट में शिफ्ट कर दिया गया और चार महीने तक लगातार इनका शोषण व रेप किया गया।

इन युवतियों का आरोप है कि उस फ्लैट में जो भी आता वही उनके साथ रेप करता था। कभी-कभी तो एक साथ कई-कई लोग इन्हें डराकर इनके साथ अप्राकृतिक संबंध भी बनाते थे।

वो तो इनके साथ ही वहां बंद दार्जिलिंग की एक युवती नीतू वहां से भागने में कामयाब हो गई और एनजीओ को सूचना दी और सारी बात बताई वरना ये दोनों युवतियां ऐसे ही दरिंदों के जुल्म का शिकार होती रहतीं।
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