निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले चारों दोषी दिल्ली के रविदास कैंप इलाके के निवासी हैं। मंगलवार को जब पटियाला हाउस कोर्ट ने इनके खिलाफ डेथ वारंट जारी किया तो पूरे कैंप इलाके में इनके पड़ोसियों का यही कहना था कि वे इन अपराधियों का मुंह तक नहीं देखेंगे। उन्होंने कहा कि फांसी होने के बाद पुलिस रात के अंधेरे में ही शव लेकर पहुंचे। वे नहीं चाहते कि दिन में उनके बच्चे इनके बारे में कुछ भी पूछें।
रविदास कैंप रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष बिहारी लाल का कहना है कि पूरे देश में पहले से ही इन अपराधियों के चलते इलाके का नाम बदनाम हुआ है। जब भी वे उनके घरों को देखते हैं तो दिल में भरा गुस्सा बाहर आने लगता है। हमारे बच्चों पर भी इसका गलत असर पड़ रहा है। इन पापियों का मुंह तक देखना नहीं चाहता कोई।
मुकेश, उसका भाई रामसिंह, अक्षय, पवन और विनय के मकान अभी रविदास कैंप में हैं। मुकेश और रामसिंह दोनों एक ही घर जे-41 में अपने परिवार के साथ रहते थे, लेकिन सात साल पहले हुई उस खौफनाक घटना के कुछ समय बाद पिता मांगेराम का निधन हो गया और बूढ़ी मां राजस्थान स्थित अपने पैतृक गांव लौट गई।
फिलहाल इनके घर में अब कोई नहीं रहता। वहीं, पास में ही स्थित मकान नंबर ए-64 में दोषी पवन रहता था। फिलहाल इस मकान में उसके पिता हीरालाल, बड़ी बहन और बूढ़ी मां रहती है।
हीरालाल आरकेपुरम सेक्टर-1 में फलों की रेहड़ी लगाते हैं। दोषी विनय शर्मा का मकान नंबर जे-105 है। उसके पिता हरिराम दिल्ली एयरपोर्ट पर बेलदारी का काम करते हैं। घर में विनय का भाई और उसकी पत्नी भी रहती है।