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ऐसे हो रहा बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़, मिड डे मील बनाने में हो रही धांधली

Fri, 12 May 2017 10:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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म‌िड डे मील में म‌िला सांप का बच्चा - फोटो : अमर उजाला
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फरीदाबाद में मिड डे मील में सांप का बच्चा निकलने के बाद जिले के करीब 70 हजार विद्यार्थियों को भूखा रहना पड़ा। खाने के इंतजार में जब बच्चे भूख से बिलबिलाने लगे तो जिला शिक्षा विभाग ने एक से डेढ़ घंटे पहले ही बच्चों को छुट्टी कर घर भेज दिया। जिन स्कूलों में मिड डे मील बंटने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, जिला शिक्षा विभाग ने उन स्कूलों बच्चों की स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी मांगी।
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दोपहर करीब 11:15 बजे एनआईटी दो स्थित राजकीय स्कूल में मिड डे मील के तहत बांटी जा रही खिचड़ी में सांप का बच्चा निकलने के बाद आननफानन में जिला शिक्षा विभाग की तरफ से सभी स्कूलों में संपर्क साधा गया।

अधिकारियों की तरफ से एक सर्कुलर भी सभी स्कूलों को जारी कर दिया गया, जिसमें उल्लेख किया गया था कि एहतियाती तौर पर किसी भी स्कूल में खिचड़ी न बांटी जाए। वहीं, इस घटना की जानकारी तुरंत व्हाट्सएप ग्रुप पर डाले जाने से सभी स्कूलों तक समय से सूचना पहुंच गई। मिड डे मील न मिलने से हजारों बच्चों को भूखा रहना पड़ा।
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राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान चतर सिंह ने बताया कि कई स्कूलों ने तो मामले की जानकारी मिलते ही छुट्टी कर दी थी, ताकि बच्चों को परेशानी न उठानी पड़े। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला सचिव मुकेश गर्ग ने बताया कि शाम चार बजे तक स्कूलों ने बच्चों के स्वास्थ्य संबंधित जानकारी एकत्रित कर अधिकारियों तक पहुंचाई।

बच्चों का हो रहा मोहभंग

म‌िड डे मील में म‌िला सांप का बच्चा - फोटो : अमर उजाला
बताया जा रहा है कि जिले के स्कूलों में वितरित होने वाला मिड डे मील कई बार कच्चा होने के साथ बेस्वाद भी होता है। ऐसे बच्चों की कमी नहीं है जो मिड डे मील पर निर्भर न रहकर घर से खाना लेकर जाते हैं। बताया जा रहा है कि स्कूलों में 65 से 70 फीसदी बच्चे भोजन को ग्रहण कर रहे हैं।

सोमवार को चना-चावल, मंगलवार को मीठा दलिया, बुधवार को खिचड़ी, गुरुवार को दाल-रोटी, शुक्रवार को पुलाव एवं शनिवार को कढ़ी चावल का वितरण किया जाता है। इसमें चावल की मात्रा अधिक होने के कारण बच्चे मिड डे मिल से दूर भाग रहे हैं। वहीं,दलिया भी बच्चे पसंद नहीं कर रहे हैं।

यह है नियम
कक्षा एक से पांच तक 4.13 रुपये एवं कक्षा छह से आठ में 6.18 रुपये की राशि मिड डे मिल के लिए प्रत्येक बच्चे के लिए निर्धारित है। प्राथमिक के छात्रों को 450 ग्राम कैलोरी एवं 12 ग्राम प्रोटीन तथा अपर प्राथमिक में 700 कैलोरी एवं 20 ग्राम प्रोटीन दिया जाना निर्धारित है। वर्तमान में बच्चे जो खाना पसंद ही नहीं कर रहे। ऐसे में पौष्टिकता हो या न हो, क्या फर्क पड़ता है।
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7 बजे का तैयार भोजन बंटता है 12 बजे

म‌िड डे मील में म‌िला सांप का बच्चा - फोटो : अमर उजाला
इस्कॉन संस्था की तरफ से करीब भोजन तैयार किया जाता है। इसके लिए सुबह पांच बजे से तैयारी शुरू हो जाती है। वह भोजन दोपहर 12 बजे विद्यार्थियों तक पहुंचते पहुंचते ठंडा हो जाता है। वहीं उसका स्वाद भी बिगड़ जाता है। ऐसे में जिले के कई विद्यार्थियों का मिड डे मिल भोजन से मोहभंग हो चुका है।

संस्था की तरफ से बांटे जाने वाले भोजन की टेस्टिंग होनी चाहिए। दोपहर 12 बजे बंटने वाला भोजन सुबह 7 बजे तैयार हो जाता है। ऐसे में फूड पॉयजनिंग होने की संभावना रहती है। विभाग के अधिकारियों को मिड डे मिल के तहत अंतिम स्कूल की जांच करनी चाहिए कि बांटा गया भोजन कितना सही है। सूचना के अधिकार के तहत जवाब मांगा गया है।-रविंद्र चावला, शिक्षाविद्

मिड डे मिल के मामले समय समय पर सामने आ रहे हैं। इसके लिए इस्कॉन संस्था को शिकायत की जा रही है। इस मामले को विभाग के समक्ष रखा जाएगा।-राजसिंह, जिला प्रधान, हरियाणा विद्यालय अध्यपाक संघ

मामले की जांच की जा रही है। नमूने को लैब टेस्टिंग के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तरफ से भेजा गया है।-सतेंद्र कौर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, फरीदाबाद
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