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NCR में जमकर बिक रही है गांजे की 'पुड़िया'

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नशे के कारोबार ने एनसीआर को पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया है। तस्कर युवा पीढ़ी के खून में ‘पुड़िया’ यानी नशीले पदार्थ का जहर घोल रहे हैं। यह नशीला पदार्थ आसानी से चाय और पान की दुकान में मिल जाता है। बेरोकटोक यह गोरखधंधा चल रहा है।
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नशे के ये सौदागर एनसीआर के सभी शहरों में सक्रिय हैं। अमर उजाला ने बृहस्पिवार को नोएडा में पड़ताल की। यहां कॉलेज, कॉल सेंटर, दुकान, डांस बार तक इनका जाल फैल चुका है। जहां आसानी से गांजा, चरस, ब्राउन शुगर से लेकर स्मैक जैसे नशीले पदार्थ बिक रहे हैं।

शहर की युवा पीढ़ी शौक में इनके चंगुल में फंस रही है। इनमें से कई अब इसके एडिक्ट हो चुके हैं। आम व्यक्ति के रूप में ये तस्कर शहर के हर कोने में फैले हुए हैं। पांच सौ मीटर से दो किलोमीटर तक का क्षेत्र तय कर काला कारोबार चला रहे हैं।
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गलती से भी कोई अपना क्षेत्र छोड़कर दूसरी जगह नहीं जाता है। ऐसा भी नहीं है कि इनका ठिकाना ढूंढना मुश्किल हो। रेहड़ी से लेकर प्रत्येक रिक्शे वाला जगह के हिसाब से इनका अड्डा बता देता है।
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झुग्गी बस्तियों से होती है थोक बिक्री

नशीले पदार्थों की थोक बिक्री झुग्गी-बस्तियों से होती है। इनमें भी सेक्टर-8 और 9 की बस्ती इसके केंद्र है। पुलिस भी आसानी से नहीं पहुंच सकती। तस्कर इतनी सफाई से नशे का कारोबार करते हैं कि आसपास के झुग्गी वासियों को भनक भी नहीं लगती। यहां से नशीले पदार्थ उन्हीं व्यक्तियों को मिलते हैं, जो इस धंधे में शामिल होते हैं। बिना जान-पहचान के किसी व्यक्ति से कोई लेनदेन नहीं होता।

युवा सबसे बड़े खरीदार
नशीले पदार्थों के सबसे बड़ा खरीदार युवा वर्ग है। इनमें से अधिकांश वो हैं जो कि माता-पिता से दूर यहां रहकर पढ़ाई या नौकरी कर रहे हैं।

30 रुपये से लेकर महंगी पुड़िया तक उपलब्ध
शहर में सहज उपलब्ध नशीले पदार्थों की कीमत 30 रुपये से लेकर हजारों में है। इनमें गांजा सबसे सस्ता है। जिसकी पुड़िया महज 30 से 35 रुपये में मिल रही है। वहीं, महंगे नशीले पदार्थों में ब्राउन शुगर और स्मैक (क्रिस्टल) है। इसके दस ग्राम की कीमत दस हजार है।

सामाजिक कार्यकर्ता रचना गुप्ता बताती हैं कि "रोजाना नए मामले सामने आ रहे हैं। इनके दुष्प्रभावों से अनजान युवा वर्ग सबसे ज्यादा इसका शिकार हो रहा है। प्रशासनिक कार्रवाई के बिना शहर को इससे मुक्ति नहीं मिल सकती।"
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