एनसीईआरटी के निदेशक ने कहा कि एनसीईआरटी भेदभाव नहीं करता। हमने हर विषय का सिलेबस कम किया है, कमेटी की सिफारिश और बच्चों का बोझ कम करने का फैसला लिया गया है।
एनसीईआरटी की किताबों से मुगल साम्राज्य के अध्याय हटाये जाने पर उठे सवालों पर निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा है कि हम किसी से भेदभाव नहीं करते हैं। हमने हर विषय का सिलेबस कम किया है। यह फैसला कमेटी की सिफारिश और बच्चों का बोझ कम करने के आधार पर लिया गया था। उन्होंने कहा कि मुगलों के सभी अध्यायों को नहीं हटाया गया है। इस मुद्दे पर झूठ फैलाया जा रहा है।
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एनसीईआरटी निदेशक ने कहा कि एनसीईआरटी बिना किसी भेदभाव से काम करता है। जो युक्तिसंगत सिलेबस है, उसी के हिसाब से इस बार की परीक्षाएं हो रही हैं। आगे जो पाठ्यक्रम होगा, वो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत ही निर्धारित होगा। कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। बच्चों का महामारी के दौरान बोझ कम करना था। नये सिलेबस के आधार पर इसी सत्र से पढ़ाई होगी।
दरअसल, कोरोना महामारी के कारण छात्रों पर दबाव था। इसीलिए विशेषज्ञों समिति गठित की गई थी। इसी समिति ने कक्षा छह से लेकर 12 तक की किताबों की जांच की थी। उसकी सिफारिश थी कि यदि 12वीं की इतिहास की पुस्तक से मुगलों से संबंधित दो में से एक अध्याय हटा दिया जाता है, तो इससे बच्चों के ज्ञान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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12वीं की इतिहास की पुस्तक में से मुगलों पर अध्याय आठ और नौ है। सिर्फ नवां अध्याय हटाया गया है। विशेषज्ञों ने यह महसूस किया था कि राजाओं के बारे में जानकारी देने के बजाय मुगलों के किए गए बेहतर कामों के बारे में बच्चों को जानना चाहिए।
अध्याय आठ में मुगलों द्वारा समाज के लिए किए गए कार्यों का जिक्र है। यह ज्यादा जरूरी नहीं है कि कौन कब राजा बना। ज्यादा जरूरी यह है कि मुगलों की नीतियां क्या थी। इसलिए इस मुद्दे पर हो रही बहस ठीक नहीं है। पहले किताब देखनी चाहिए, उसके बाद सवाल उठाएं। वहीं, मुगल इतिहास के साथ-साथ नागरिक शास्त्र का सिलेबस भी बदला गया है। फिराक और निराला की रचनाएं भी अब पाठ्यक्रम में नजर नहीं आएंगी।