चर्चित नजारत कांड प्रकरण में बृहस्पतिवार को गवाह अनोखे लाल ने अपने बयान दर्ज कराए। अनोखे लाल ने बताया कि उसने वर्ष 2000 में तत्कालीन जिला जज आरपी मिश्रा के लखनऊ स्थित निजी आवास पर करीब तीन माह तक काम किया था।
गवाह से पूर्व जिला जज अरुण कुमार ने स्वयं ही जिरह की। पूर्व जज के एक सवाल पर अनोखे लाल कोर्ट में ही रो पड़ा। कई घंटे चली कार्रवाई के बाद न्यायाधीश डा. एके सिंह ने जिरह के लिए अब 3 फरवरी नियत की है।
अपने बयान में अनोखे लाल ने बताया कि लखनऊ जाने के लिए उसे आशुतोष अस्थाना ने फोन किया था। मना करने पर उसे नौकरी से निकाल देने की धमकी भी दी गई थी।
यह बात उसने विजिलेंस, पुलिस, सीबीआई और पूर्व में मजिस्ट्रेट को दिए गए बयानों में भी बताई थी। यह बात गलत है कि उसे कभी नौकरी से निकालने की धमकी न दी गई हो।
पूर्व जिला जज अरुण कुमार ने गवाह से स्वयं जिरह की। उनके सवाल का जवाब देते हुए अनोखे लाल का कहना था कि इस मुकदमे में उसका जुर्म इतना है कि उसके बैंक एकाउंट में जो ट्रेजरी चेक आए थे वो पूर्व जिला जजों और नाजिर आशुतोष अस्थाना के द्वारा बढ़ई का काम कराने के संबंध में हैं।
जब-जब चेक आए हैं, तब उसने बढ़ई का काम किया था। गवाह के अनुसार उसके खाते में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जीपीएफ के 4 चेक जमा हुए थे। इनकी कुल धनराशि 4.70 लाख रुपये बनती है। समय-समय पर उसने इस चेकों की धनराशि का विड्राल किया था।
गवाह का कहना था कि फरवरी 2008 में उसे फोन करके कचहरी बुलाया गया था। वहां आशुतोष अस्थाना ने सील हुए स्टोर रूम की खिड़की की ग्रिल तोड़ने को कहा तो उसने मना कर दिया।
इस पर अस्थाना ने उसे अपशब्द कहे थे। बाद में अस्थाना और उसके लोग डरा धमकाकर उसे गोविंदपुरम स्थित अस्थाना के आवास पर ले गए, जहां सुबह 3-4 बजे तक उसे बंधक बनाकर रखा गया।