मित्र बदल सकते हैं, पड़ोस नहीं
पूर्व मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता हरिश्चंद्र भाटी ने बताया कि अटलजी नाम के ही नहीं, बल्कि नाम के भी नेता थे। उनकी कही बात ‘मित्र बदल सकते हैं लेकिन पड़ोसी
नहीं’ जैसे कई राजनीतिक उदाहरण हैं। पार्टी में उनके विचार ही आज मूलमंत्र हैं। उनकी 40 साल की सक्रिय राजनीति का लोहा सभी मानते हैं।
दलगत राजनीति से ऊपर थे
सपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे मदन चौहान ने कहा कि अटलजी सभी दलगत राजनीति से ऊपर थे। उन जैसे वक्ता, मानवता, योग्यता नहीं देखने में मिलेगी। उनका व्यक्तित्व
राजनीति से ऊपर ही था। उनकी योग्यता पर कोई प्रश्न चिन्ह नहीं लगा सकता। उनकी बात तो सभी सुनते थे। उनकी पकड़ सभी दलों में थी।
नेताओं को सीख लेनी चाहिए
समाजसेवी अनूप खन्ना का कहना है कि अटलजी सभी के थे। वह किसी एक पार्टी के ना होकर सभी दल उनको नेता मानते थे। प्रखर वक्ता व कवि के रूप में भी उन्होंने
विशेष छाप छोड़ी है। हिंदुस्तान को ऐसे ही नेता की जरूरत है। शुक्रवार को दादी की रसोई में अटलजी के नाम से लोगों को भोजन खिलाया जाएगा।
सबको साथ लेकर चले थे अटल
बसपा के पूर्व विधायक सत्यवीर गुर्जर ने कहा कि अटलजी ने राजनीति में सबको साथ लेकर चलना सिखाया है। वे सर्व मान्य नेता थे। उनका व्यक्तित्व निराला था।
उन्होंने राजनीति में अमिट छाप छोड़ी है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं।
चार बार कैलाश अस्पताल में कराया था इलाज
जब मैं 14 साल का था तो आरएसएस से नाता जुड़ गया था। त्योहारों पर दिल्ली जाकर अटलजी से आशीर्वाद जरूर लेता था। उनकी वैचारिकता, मौलिकता,
व्यवहारिक व उदारता काबिले तारीफ थी। भारतीय राजनीति में उन जैसा वक्ता नहीं हुआ। अटलजी रुटीन चेकअप के लिए कैलाश अस्पताल में तीन-चार बार आए थे।
उनकी बहुत याद आएगी।
- डॉ. महेश शर्मा, सांसद व केंद्रीय मंत्री
मेरे लिए अलग से शपथ ग्रहण का आयोजन कराया
मैं सौभाग्यशाली हूं कि अटलजी के मंत्रिमंडल में काम करने का मौका मिला। वे मार्गदर्शक राजनीतिक गुरु व पिता तुल्य रहे। मैं वर्ष 2000 में केंद्रीय मंत्री बना तो
विदेश में होने से उस समय शपथ ग्रहण में शामिल नहीं हो पाया था, लेकिन बाद में उन्होंने सिर्फ मेरे लिए ही अलग से शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन कराया था। एक
बार किसी नेता ने बुराई कर दी तो उन्होंने समझाया था कि राजनीति में संयम रखो, सब जगह जीत मिलेगी। अगर आपकी कोई बुराई करता है तो मान लीजिए कि वह
आपसे पीछे है।
- अशोक प्रधान, क्षेत्र से चार बार सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री
मेरी पीठ थपथपाई थी
2007 में जब मुझे वाराणसी क्षेत्र की चिरई से विधानसभा का टिकट मिला था। मैंने अटलजी से मिलकर कहा कि अभी हमें चुनाव नहीं लड़ना, पार्टी के लिए काम करना
है तो उन्होंने मेरी पीठ थपथपाई थी। उनका आशीर्वाद आज भी याद है। बचपन में भी पिता राजनाथ सिंह के साथ अटलजी से मिलने जाता था, उनको सुनने से सीख
मिलती थी।
- पंकज सिंह, विधायक नोएडा