कोरोना काल में संक्रमण से बचाव के साथ-साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी एक चुनौती बन गया है। इसी कड़ी में बाजार में फेस मास्क की जरूरत भी बढ़ गई है। बाजार में मिलने वाले साधारण मास्क ना तो कोरोना के संक्रमण का पूर्णता से बचाव करते हैं और न ही स्वास्थ्य के लिए भी अच्छे होते हैं। यह मास्क पर्यावरण को भी नुक्सान पहुंचा रहे हैं।
इससे बचने के लिए बाजार में एक नए तरीके का प्राकृतिक और आयुर्वेदिक फेस मास्क आया है, जिसे हट-के फेस मास्क के नाम से जाना जाता है। हट-के फेस मास्क के डायरेक्टर विभांशु चतुर्वेदी बताते हैं की आजकल बाजार में प्राकृतिक व आयुर्वेदिक फेस मास्क चलन में है। खादी के कपडे, केले के छाल, मकई फाइबर, युकलिप्टुस, सोयाबीन फैब्रिक, बांस आदि से बने मास्क ना केवल कोरोना के संक्रमण से बचाव करते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होते हैं।
साथ ही साथ इनमें आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों जैसे हल्दी, नीम, तुलसी, एलोवेरा, मजिष्ठा आदि की डाई का प्रयोग किया जाता है जो अन्य साधारण केमिकल वाले फैब्रिक के मास्क की तरह हानिकारक नहीं होता।
इस तरह के मास्क का निर्माण अधिकतर भारत के गांव और कस्बों में किया जा रहा है, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सुझाए गए 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी मुहीम को भी बल मिल रहा है। हट-के द्वारा बनाए गए प्राकृतिक व आयुर्वेदिक फेस मास्क की जरुरत ना केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी बढ़ रही है।
इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिल रहा है। प्राकृतिक व आयुर्वेदिक फेस मास्क के अधिक इस्तेमाल होने से भारतीय लोक कला और गांवों के अद्वितीय स्वदेशी कपड़ों को वैश्विक बाजार में दृश्यता मिल रही है।