राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पौत्री जीबीयू में नौकरी (संविदा पर एसोसिएट प्रोफेसर) के लिए हुए भेदभाव पर कई माह से न्याय की गुहार लगा रही है। अब उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को लिखित शिकायत भेजी है।
मूलरूप से झांसी के चिरगांव निवासी अंजना सोलंकी ने बताया है कि उन्होंने प्रबंधन बोर्ड के आमंत्रण पर 27 जुलाई 2010 को गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड एंप्लाइड साइंसेज में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था।
कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व वह बुंदेलखंड अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थी। उस वक्त बीआईईटी में छठा वेतनमान लागू नहीं किया गया था जबकि जीबीयू में इसे लागू कर दिया गया था।
उनका आरोप है कि तत्कालीन कुलपति ने उन्हें आश्वासन दिया था कि बीआईईटी में छठा वेतनमान लागू होने पर उन्हें प्रोफेसर पदनाम और वेतनमान लागू कर नियमित कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि प्रत्येक वर्ष उनका कार्यकाल बढ़ाया गया लेकिन 30 सितंबर वर्ष 2016 को उन्हें देर रात उनकी सेवाएं समाप्त करने का एक नोटिस पहुंचाया गया।