जंतर मंतर पर मंगलवार को देश के करीब 40 से ज्यादा सामाजिक संगठनों ने मिलकर केंद्र सरकार से राष्ट्रीय पुरुष आयोग बनाने की मांग की। उनका कहना है कि घरेलू हिंसा कानून और डीवी कानून के चलते देश में पुरुषों की आत्महत्याएं बढ़ रही हैं। झूठे मुकदमे लगाकर पुरुषों के खिलाफ अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से पुरुष कल्याण मंत्रालय और पुरुष थानों का निर्माण करने की भी मांग की। पुरुष आयोग राष्ट्रीय समन्वय समिति के अनुसार देश में हर साल कानून के चलते 96 हजार पुरुष आत्महत्या कर रहे हैं।
महासचिव रामनाथ दास (भूतपूर्व सैनिक) ने बताया कि पुरुष आयोग की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा और डीवी जैसे कानून के तहत करीब 98 फीसदी झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। साल 1998 से लेकर 2015 के बीच 27 लाख गिरफ्तारियां देश भर में हुई हैं। इसमें 6.5 लाख महिलाएं और 7700 नाबालिग बच्चे शामिल हैं।
धारा 498ए कानून में मेडिकल टेस्ट, लाई डिक्टेटर और नार्को टेस्ट शामिल किया जाना चाहिए। दहेज देने वालों को एवं झूठे दहेज के मुकदमे करने वालों को सश्रम 10 वर्ष की कड़ी सजा या 50 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। झूठे मुकदमे की वजह से जिन पुरुषों की नौकरी चली गई, उन्हें सरकारी नौकरी दी जाए या पुनर्वास के लिए 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।