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Delhi NCR News: राष्ट्रीय डेंटल पाठ्यक्रम बदलेगा, दिव्यांगता आधारित प्रशिक्षण पर रहेगा जोर

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भविष्य के दंत चिकित्सकों को सभी वर्गों के मरीजों को बेहतर और समान स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए तैयार किया जा सकेगा
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल डेंटल कमीशन (एनडीसी) भारत के राष्ट्रीय डेंटल पाठ्यक्रम (नेशनल डेंटल करिकुलम) में व्यापक बदलाव करने की तैयारी में है। प्रस्तावित बदलावों में दिव्यांगता से जुड़ी क्षमताओं और समावेशी दंत चिकित्सा शिक्षा को प्रमुखता दी जाएगी। इससे भविष्य के दंत चिकित्सकों को सभी वर्गों के मरीजों को बेहतर और समान स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए तैयार किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया के करीब एक-तिहाई डेंटल स्कूल भारत में हैं। ऐसे में भारतीय पाठ्यक्रम में विकलांगता संबंधी प्रशिक्षण को शामिल करने का प्रभाव केवल देश तक ही नहीं बल्कि वैश्विक मौखिक स्वास्थ्य कार्यबल की शिक्षा पर भी सकारात्मक रूप से पड़ेगा। इस विषय पर तैयार किए गए एक शोध पत्र में ऐसा टेम्प्लेट प्रस्तुत किया गया है, जिसे पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के डेंटल शिक्षा संस्थानों में अपनाया जा सकता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि डेंटल शिक्षा को केवल स्पेशल केयर की अवधारणा तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए बल्कि इसे समावेशी और सभी के लिए सुलभ बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यूनिवर्सल डिजाइन पर आधारित डेंटल चेयर न केवल व्हीलचेयर उपयोग करने वाले मरीजों के लिए सुविधाजनक होती है, बल्कि बाएं हाथ से काम करने वाले और दिव्यांग दंत चिकित्सकों के लिए भी समान रूप से उपयोगी साबित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, समावेशी डिजाइन किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए बेहतर और व्यावहारिक व्यवस्था का उदाहरण है।
प्रस्तावित पाठ्यक्रम सुधारों से भारत में समावेशी डेंटल शिक्षा को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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