नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने की मांग वाली एक याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्टेशन का नामकरण सरकार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) का नीतिगत एवं प्रशासनिक मामला है, जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप तभी संभव है जब फैसला मनमाना हो या संविधान का उल्लंघन करता हो।
रंगपुरी गांव की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने याचिका दायर कर निर्माणाधीन महिपालपुर मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर रंगपुरी मेट्रो स्टेशन करने का निर्देश देने की मांग की थी। यह स्टेशन फेज-4 की गोल्डन लाइन (एयरोसिटी-तुगलकाबाद) का हिस्सा है, जो इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि स्टेशन के लिए अधिकांश भूमि रंगपुरी गांव से ली गई है और सरकारी नीति के अनुसार इसका नाम उसी गांव के नाम पर होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने पर वे एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने याचिका पर विचार करते हुए कहा कि अदालत स्टेशन के नाम बदलने का कोई आदेश नहीं पास करेगी। हालांकि, पीठ ने डीएमआरसी और अन्य संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं के अनुरोध पर छह सप्ताह के भीतर विचार करने का निर्देश दिया। यदि किसी अन्य विभाग की राय आवश्यक होगी, तो उस पर भी विचार होगा।