दिल्ली हाईकोर्ट ने नैना साहनी तंदूरकांड मामले में दोषी सुशील शर्मा को पैरोल देने के मुद्दे पर तुरंत सुनवाई से इंकार कर दिया है। अदालत ने फिलहाल दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
साथ ही कोर्ट ने तीन सप्ताह के फरलो पर रिहा शर्मा को जेल प्रशासन के सामने समर्पण करने को कहा है। न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी के सामने शर्मा के अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल को जेल प्रशासन ने तीन सप्ताह की फरलो दी थी, जिसकी अवधि 26 जून को खत्म हो रही है।
उनके मुवक्किल की मां को डॉक्टरों ने घुटने की सर्जरी कराने की सलाह दी है। उसके बाद उनकी फिजियोथैरेपी होनी है। उनकी देखभाल के लिए शर्मा को तीन माह की पैरोल प्रदान की जाए। अदालत ने मामले पर तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए पुलिस को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
अदालत ने सुनवाई 9 जुलाई तय करते हुए दोषी शर्मा को 26 जून को जेल प्रशासन के समक्ष समर्पण करने को कहा है। सुशील शर्मा ने दिल्ली सरकार के 22 मई के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसे पैरोल देने से इनकार कर दिया गया था।
आरोप है कि शर्मा ने अपनी पत्नी नैना साहनी की 3 जुलाई 1995 को हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने अपने साथी केशव के साथ मिलकर बगिया रेस्टोरेंट स्थित तंदूर में शव के टुकड़े कर जला दिया था।
निचली अदालत ने उसे वर्ष 2003 में मृत्यु दंड की सजा सुनाई थी व हाईकोर्ट ने भी वर्ष 2007 में सजा बहाल रखी थी। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 8 अक्तूबर 2013 को सजा आजीवन कारावास में तब्दील करते हुए कहा था कि वह ताउम्र जेल में रहेगा।