बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने वाले युवक सुभाष की हत्या में दो लोगों को निचली अदालत से मिली उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट ने आठ साल में तब्दील कर दिया।
जस्टिस एस मुरलीधर व जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने सुनील व सुधीर को हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या का दोषी माना। कोर्ट ने चार अन्य दोषियों सुरेश, सुरेंद्र, राजकुमार और संजय को भी राहत देते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को आठ साल की सजा में बदल दिया।
अभियोजन के मुताबिक सुनील व सुधीर ने 20 जुलाई 2014 की रात सुभाष की बहन पर छींटाकशी करते हुए गंदे इशारे किए।
सुभाष के विरोध करने पर दोनों चले गए, लेकिन कुछ समय बाद दोनों चार अन्य लोगों के साथ वापस सुभाष के घर आए और उस पर बेसबॉल के बैट, लोहे की रॉड व खाली बोतलों से हमला कर दिया। सुभाष को बचाने में दो पड़ोसी भी घायल हो गए थे।