दिल्ली में एकीकृत नगर निगम की तरह तीनों नगर निगम के स्कूलों में सालों से करीब पांच हजार युवक-युवतियां अनुबंध के आधार पर टीचर थे।
इस वर्ष डीएसएसबी ने करीब तीन हजार शिक्षक स्थायी तौर पर भर्ती कर दिए जिनकी नगर निगम में नियुक्ति भी हो गई है।
इसके चलते नगर निगम ने अनुबंध के आधार पर पढ़ाने वाले शिक्षकों का करार नहीं बढ़ाया। इस तरह बाकी बेरोजगार हो गए। और अब इसका असर तय हो चुकी शादियों के टूटने के तौर पर सामने आ रहा है।
सिविक सेंटरों के चक्कर लगा रहे हैं युवा
युवा अपनी इस समस्या के समाधान के लिए निरंतर तीनों नगर निगम के मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनको कोई राहत नहीं मिली है।
पिछले सवा माह से सिविक सेंटर के चक्कर लगा रही सरिता बताती हैं कि उनकी शादी तय हो चुकी थी, लेकिन अब जैसे ही उनको नौकरी से हटा दिया गया है तो उनकी शादी टूटने की नौबत आ गई है।
उनकी भांति कुसुम बताती हैं कि उनके परिजन शादी के लिए लड़के की तलाश में जुटे थे, मगर वह बेरोजगार हो गई है। ऐसी स्थिति में नौकरी वाला कोई भी युवक उनके साथी करने के लिए तैयार नहीं होगा।
'घर से निकलने में भी आने लगी है शर्म'
सोनिया नामक युवती कहती है कि नौकरी से हटाने के बाद उनको घर से निकलने में शर्म आ रही है, क्योंकि मोहल्ले के लोग उनसे नौकरी पर नहीं जाने के बारे पूछते हैं।
इस मामले में अविवाहित युवकों की स्थिति इन युवतियों से अलग नहीं है। युवक संदीप ने बताया कि उनकी भी शादी तय हो गई है और यह शादी नौकरी के चलते ही तय हुई थी, लेकिन अब लड़की वालों को उनकी नौकरी चली जाने के बारे में मालूम होगा तो हो सकता है कि उनकी शादी टूट जाए।
वह अपनी नौकरी दोबारा पाने के लिए कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। भूख हड़ताल करके नेताओं व अधिकारियों का ध्यान भी आकर्षित किया जा चुका है, पर परिणाम सामने नहीं आया है।