दो दिन पहले हुई बारिश और पानी के टैंकरों की वजह से सिंघु बॉर्डर के दोनों तरफ जलभराव और कीचड़ के कारण किसान समर्थकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कीचड़ की वजह से कई किसानों के चप्पल औ जूते भी इसकी चपेट में आकर खराब हो जा रहे हैं। लोगों को परेशानी न आए इसलिए सड़क किनारे जूते चप्पलों की बिक्री भी हो रही है।
लंगर के बाद आसपास बिखरे प्लेट, पानी की बोतलें भी इधर उधर बिखरे होने की वजह से भी आंदोलनकारी किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यहां लगाए गए अस्थायी शौचालयों में किसी में पानी की कमी तो कुछ के दरवाजे बंद नहीं होते हैं।
आंदोलनकारी किसानों की संख्या अधिक होने की वजह से अस्थायी शौचालयों की कमी को देखते हुए नए टॉयलेट्स भी लगाने के लिए सरकार के साथ साथ संस्थाएं भी आगे आ रही हैं। आंदोलन में पुरुषों के साथ साथ महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आंदोलन के लंबा खिंचने पर भी कोई परेशानी न आए, इसके लिए भी सभी इंतजाम किए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेती के दौरान उन्हें सभी तरह के माहौल में रहने की आदत है। लेकिन गंदगी के कारण कई बार परेशानी होती है।