ऑडिटर ने कहा है कि इससे साफ होता है कि करार रीती स्पोर्ट्स को पैसा देने के लिए किए गए। कानून के तहत इस रकम को वापस लिया जाना चाहिए। ऑडिटरों की इस रिपोर्ट का जिक्र जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने अपने 270 पेज के फैसले में किया है। इस साल अप्रैल में धोनी ने आम्रपाली समूह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर 10 साल पहले बुक कराए 5500 वर्ग फीट का पेंटहाउस दिलाने की मांग की थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 20 मार्च 2015 को हुए करार के तहत आम्रपाली समूह की कंपनियों को आईपीएल 2015 के दौरान चेन्नई सुपर किंग्स के लिए विभिन्न जगहों पर लोगो स्पेस मिला। यह समझौता केवल कागजों पर हुआ और आम्रपाली और रीती स्पोर्ट्स के बीच था। इस करार में चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से कोई हस्ताक्षरकर्ता नहीं था।
आम्रपाली माही डेवलपर्स प्रा.लि. ने रांची में एक प्रोजेक्ट के लिए करार किया था। इसके तहत आम्रपाली सफायर डेवलपर्स ने रीति स्पोर्ट्स के लिए एक फ्लैट बुक कराया था। हालांकि रीति स्पोर्ट्स के संजय पांडेय ने कहा कि कंपनी या किसी व्यक्ति आम्रपाली समूह में कोई फ्लैट नहीं है।