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सांसद से मीटिंग में हुआ फैसला, लगेगा वाटर यूजर चार्ज

Thu, 03 Jul 2014 11:42 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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केंद्रीय मंत्री रिटा. जनरल वीके सिंह के साथ बैठक में नगर निगम ने लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का निर्णय लिया। इससे लोगों पर अब एक और बोझ बढ़ेगा। बैठक में महानगर के विकास का खाका तैयार किया।
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कूड़ा निस्तारण को ठोस नीति तैयार की गई और नालों की सफाई-निर्माण कराने की योजना तैयार की गई। महानगर में अब लाइट बदलकर बिजली बजट में कमी की जाएगी।

बैठक में अफसरों ने तर्क रखा कि नगर निगम गंगाजल को खरीदकर निशुल्क वितरित करता है। महानगर में वाटर यूजर चार्ज नहीं है। ऐसे में लोग इसकी बर्बादी करते हैं। लोगों में पानी बचाने की प्रवृति लाने और पानी बचाने के लिए वाटर यूजर चार्ज लगाने का निर्णय लिया गया।

बोर्ड बैठक में यूजर चार्ज की धनराशि तय कराई जाएगी। इसके बाद वाटर मीटर लगाकर चार्ज वसूला जाएगा। इससे लोगों पर महंगाई की एक और मार पड़ेगी। एक परिवार पर कम से कम 12 सौ रुपये सालाना का बोझ पड़ेगा।
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इसके साथ ही महानगर की प्रत्येक कालोनी में कूड़ा निस्तारण सिस्टम लगाने का निर्णय लिया गया। बिल्डर भी कालोनी बसाते समय इसके लिए जगह छोड़ेंगे। इससे कूड़ा उठान पर होने वाला खर्च बचेगा तथा कालोनी में ही निस्तारण करके इसकी खाद बेच दी जाएगी।

केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक में महानगर की स्ट्रीट लाइटों के बल्व हटाकर एलईडी लगाने का निर्णय लिया गया। महानगर की 56 हजार लाइटों से लाखों रुपये सालाना के बिजली बजट की बचत की जा सकेगी। महानगर में करीब 50 रुपये सालाना की बिजली बचाई जा सकेगी।

बैठक में केंद्रीय मंत्री वीके सिंह के साथ महापौर तेलूराम कांबोज, नगर आयुक्त एसके सिंह, उप नगर आयुक्त डीके सिंहा, जीएम जलकल वाईके जैन, महाप्रबंधक जल निगम अरविंद कुमार और यूपीएसआईडीसी के आरएम मयंक श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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यह भी लिया गया फैसला
सीवरेज सिस्टम के लिए प्रथम फेज में 78 करोड़ का बजट मिला था, दूसरे चरण के लिए 120 करोड़ रुपये की मांग की गई।
नालों की हालत सुधारने की अतिरिक्त बजट की व्यवस्था की जाएगी, इसमें केंद्र व राज्य सरकार से सहयोग लिया जाएगा।
नालों के किनारे और निगम की खाली जमीन पर पौध रोपण किया जाएगा।
भूजल संचय के लिए नालों में फिल्टर लगाए जाएंगे।
महानगर में 236 एमएलडी पानी की रोजाना सप्लाई है, जबकि 196 एमएलडी सीवर में बह जाता है।
ट्रीटमेंट प्लांट का पानी लोगों को निर्माण और धुलाई-सफाई के लिए दिया जाएगा।
भूजल में छोड़े जा रहे गंदे पानी को सख्ती से बंद कराया जाएगा।
प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर शिकंजा कसा जाएगा।
कूड़ा निस्तारण के लिए यूपीएसआईडीसी तत्काल 60 एकड़ जमीन की व्यवस्था करेगा। इसको दो अलग-अलग स्थानों पर लिया जाएगा।
कूड़ा निस्तारण का मास्टर प्लांट लगाने के लिए 80 करोड़ रुपये का बजट जुटाया जाएगा।
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