गौतमबुद्ध नगर से भाजपा सांसद डॉक्टर महेश कुमार ने लड़कियों के बाहर जाने को भारतीय संस्कृति के खिलाफ वाले अपने बयान पर सफाई दी है। महेश ने कहा कि उन्होंने कभी भी लड़के और लड़की के बीच में अंतर नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि मैं खुद एक लड़की और लड़के का पिता हूं। मैंने कभी नहीं कहा कि लड़कियों को रात में घर से नहीं निकलना चाहिए।
डॉ. कलाम पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया ने मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया है। क्या कलाम जी मुस्लिम नहीं थे या वो मानवतावादी नहीं थे।
मैंने कहा था कि हम हिंदू-मुस्लिम के आधार पर रोड का नाम नहीं बदल रहे। इसे मीडिया ने गलत तरीके से पेश किया।
भारतीय संस्कारों में महिलाएं रात में बाहर नहीं जाती
एपीजे अब्दुल कलाम पर टिप्पणी करने के बाद कि 'वो एक मुस्लिम होते भी एक राष्ट्रवादी थे', केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने एक और विवादित बयान दे दिया है।
इस बार उन्होंने लड़कियों के रात में घर से निकलने के बारे में बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि 'लड़कियां रात में घर से बाहर निकलना चाहती हैं वो कहीं और सही होगा लेकिन ये भारतीय संस्कारों का हिस्सा नहीं है।'
पहली बार गौतमबुद्ध नगर से सांसद बने 54 वर्षीय महेश शर्मा अपने भड़काऊ और भारतीय संस्कृति से संबंधित बयानों को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
'कुछ दिनों के मीट बैन में क्या आपत्ति है?'
एक न्यूज चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में उन्होंने अपने और आरएसएस के लंबे साथ के बारे में कहा कि क्या आरएसएस ने कोई राष्ट्रविरोधी काम किया है?
तो फिर आरएसएस की आलोचना क्यों करना? उन्होंने पूछा कि आखिर आरएसएस से राष्ट्रीय नीतियों के बारे में चर्चा करने में क्या बुराई है?
कुछ राज्यों में किए गए मीट बैन पर अपनी सहमति जताते हुए वो बोले कि आखिर कुछ दिनों के लिए मीट बैन करने में क्या आपत्ति है, अगर इससे हम किसी समुदाय के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं तो?
उन्होंने पलटकर पूछा कि क्या हम नवरात्रि और रमजान के दौरान कुछ चीजों पर बैन नहीं लगाते? तो अगर हम जैन समुदाय के कहने पर दस दिन का बैन लगा भी देते हैं तो क्या परेशानी है?