देशभर में 60 से अधिक अस्पतालों में मौजूद हैं मिल्क बैंक। कंगारू मदर केयर भी सहायक।
प्रति 1 हजार पर 29 नवजात वजन कम होने की वजह से मौत की चपेट में आ रहे हैं।
यूनिसेफ के अनुसार देश में 38 फीसदी शिशुओं के कद बढ़ने में आ रही हैं दिक्कतें
डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया भर में हर 5 में से 3 नवजात बच्चे ऐसे हैं जिन्हें जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान नसीब नहीं होता है। ऐसे बच्चों की संख्या दुनिया भर में 780 लाख के करीब है।
क्यों जरूरी है मां का दूध
. अधिकतर लोगों को पता नहीं है कि समय से पहले या सामान्य से कम वजन के साथ जन्मे शिशुओं के लिए स्तनपान बेहद जरूरी है। इससे उनके जीवन को बीमारियों से बचाया जा सकता है।
. जन्म के तत्काल बाद बाहरी वातावरण से शिशु को खतरा रहता है। मां का दूध शिशु को इसी वातावरण से लड़ने के लिए तैयार करता है। इसमें शुरुआती छह माह तक बच्चे की जरूरत के अनुरूप पर्याप्त पोषण उपलब्ध होता है।
. जन्म के बाद का पहला घंटा बच्चे के लिए गोल्डन ऑवर के समान होता है। स्तनपान बच्चे के लिए संपूर्ण आहार होता है। इस दूध में इतनी ताकत होती है कि यह बच्चे को संक्रमण से तो बचाता ही है वहीं बड़े होने के बाद भी मधुमेह, रक्तचाप और दिल की बीमारियों के खतरे को काफी कम कर देता है।
. छह महीने के बाद जब बच्चा बाहरी आहार लेना शुरू कर देता है, उसके बाद भी बच्चे को मां का दूध जरूर मिलना चाहिए। यह बच्चे को शारीरिक तौर पर मजबूत करता है।
(जैसा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की डॉ. आरती मारिया ने बताया)
देश के 5 फिसड्डी राज्य
राज्य रैंकिंग जन्म के 1 घंटे में स्तनपान (फीसदी में)
उत्तराखंड 25 28.8
हरियाणा 26 42.3
पंजाब 27 29.9
बिहार 28 35.4
राजस्थान 29 28.4
दिल्ली 30 28
यूपी 31 25.4
(जम्मू- कश्मीर और हिमाचल प्रदेश क्रमश: 14 वें और 15वें पायदान पर हैं। यहां जन्म के एक घंटे बाद स्तनपान की स्थिति क्रमश: 47.2 व 40.6 फीसदी दर्ज की गई है। )