दिल्ली के अशोक विहार में रहने वाले एक व्यक्ति ने मेडिकल रिसर्च और एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए मां की मौत के बाद उनके शरीर को एम्स के मेडिकल स्टूडेंट्स को दान कर दिया। अब एम्स के मेडिकल स्टूडेंट बॉडी पर पढ़ाई करेंगे या बॉडी के अंगों पर रिसर्च किया जाएगा। करीब दो वर्ष पहले पिता की मौत के बाद भी उन्होंने बॉडी को मेडिकल एजुकेशन के लिए दान कर दी थी।
अशोक विहार निवासी उमेश अरोड़ा ने अपनी मां दर्शना अरोड़ा (67) की मौत के बाद शरीर को एम्स को दान करने का निर्णय लिया। मंगलवार को बॉडी एम्स के एनाटॉमी विभाग को सुपुर्द कर दिया गया है।
एम्स के एमबीबीएस छात्रों को प्रशिक्षण देने के लिए या अंगों पर रिसर्च के लिए प्रति वर्ष कम से कम 20 मानव अंगों की जरूरत पड़ती है। इस वर्ष अब तक एम्स को सात बॉडी दान में मिल चुकी हैं। औसतन हर मेडिकल कॉलेज को पढ़ाई और रिसर्च के लिए वर्ष में 14 से 15 डेड बॉडी की आवश्यकता होती है। ज्यादातर मेडिकल कॉलेज की जरूरतें अनक्लेम्ड बॉडी से ही पूरी होती हैं।
एम्स के ट्रांसप्लांट कोआर्डिनेटर राजीव मैखुरी ने बताया कि दिल्ली के अशोक विहार में अपने बेटे और बहू के साथ रह रहीं दर्शना अरोड़ा 14 मार्च को अपने घर में ही मृत अवस्था में पाई गई थीं। उस दिन उनके बेटे-बहू घर पर नहीं थे। पुलिस की मौजूदगी में बॉडी घर से निकाली गई और जांच-पड़ताल के बाद स्वाभाविक मौत की बात सामने आई। दूसरे दिन 15 मार्च को पुलिस ने पीड़ित परिजन को बॉडी दे दी। इसके बाद एक दिन और बॉडी लोक नायक अस्पताल के शव गृह में रहा। मंगलवार को बॉडी एम्स को सुपुर्द कर दिया गया। मृतका की आंखों को मौत के कुछ समय बाद ही दधीचि देह दान समिति की मदद से दान कर दिया था।