दिवालिया हो चुकी मोजर बेयर कंपनी के दो हजार से अधिक कर्मचारियों को एनसीएलटी से राहत मिली है। एनसीएलटी ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ग्रेच्युटी, पीएफ, पेंशन फंड और मुआवजा देने का आदेश दिया है। वहीं कुछ कर्मचारियों के याचिका पर एक अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
सूरजपुर स्थित मोजर बेयर कंपनी सीडी और डीवीडी बनाती थी। जो विश्व की दूसरी बड़ी कंपनी थी। करीब 11 हजार स्थायी व चार हजार अस्थायी कर्मचारी यहां काम करते थे। कर्मचारियों ने बताया कि प्रबंधन ने जनरेटर सेट को एचएफओ से डीजल ईंधन की प्रणाली में स्थानांतरित कराने का हवाला दिया था और कंपनी बंद कर दी। चार नवंबर को जब कर्मचारी कंपनी पहुंचे तो गेेट पर ताला लगा मिला।
कर्मचारियों को ड्यूटी पर लेने से मना कर दिया गया। 31 जनवरी, 2018 को कर्मचारी संगठन के प्रार्थना पत्र पर ने एनसीएलटी ने तालाबंदी हटाने का आदेश दिया। एक फरवरी, 2018 को राज्यपाल ने शासन आदेश पारित कर छह महीने के लिए तालाबंदी को निषिद्ध कर दिया। एनसीएलटी ने 20 सितंबर 2018 को फैक्ट्री को दिवालिया घोषित कर दिया।
कर्मचारी संगठन ने एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया। संगठन के अध्यक्ष महेश शर्मा ने बताया कि महामंत्री डोरी सिंह, अधिवक्ता स्वरेन्दू चटर्जी, योगेंद्र सिंह, दिनकर सिंह, यूनियन के लीगल सलाहकार वाचस्पति यादव, ए हेमंत शर्मा, राधेश्याम शर्मा और यूनियन के सदस्य पदमाकर राजपूत, अनिल कुमार, रामनारायण सेन, विजय यादव, भूपेंद्र नागर, बिजेंद्र बसोया, राजीव कुमार ने मिलकर लड़ाई लड़ी।