जिंदगी देने वाला पानी आपकी सेहत भी बिगाड़ सकता है। चौंकिए मत, यह दावा एक आयुर्वेद डॉक्टर ने किया है। इसके लिए बकायदा वेद पुराणों के माध्यम से तर्क भी दिया है। अभी तक शरीर में पानी की कमी होने से बीमारियों के दावे सुने गए थे, लेकिन अब ज्यादा पानी पीने से भी तबीयत नासाज होने के खतरे का दावा डॉक्टर ने किया है।
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अथ आयुर्धाम क्लीनिक के संचालक व दिल्ली में सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर कंसलटेंट डा. परमेश्वर अरोड़ा ने सोमवार को पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि वेद पुराणों में शरीर की रचना के लिए पांच तत्व बताए गए हैं।
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जिसमें (क्षिती, जल, पावक, गगन, समीरा) पृथ्वी, जल, हवा अग्नि और आकाश से शरीर की संरचना तैयार हुई हैं। लिहाजा आयुर्वेद के मुताबिक पानी पीने के अलग अलग विधियां और समय निर्धारित किया गया है।
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जिसका पालन नही करने पर शरीर का पानी जहर का काम करने लगता हैं। उन्होने चरक संहिता का उदाहरण देकर बताया कि खाने के बाद भोजन पचने के लिए अमाशय में पहुंचता है । लेकिन ज्यादा पानी पी लेने से पचाने की क्षमता सुस्त पड़ जाती हैं।
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लिहाजा खाने का पोषक तत्व बिना शरीर के हिस्सों में पहुंचे नीचे की ओर खिसक जाता है और मल के रूप में बाहर निकल जाता हैं।
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पानी से ऐसे बढ़ती है बीमारी
उन्होने चरक संहिता व शास्त्रों के हवाले से कहा कि पानी का सेवन ज्यादा मात्रा में होने से शरीर को नुकसान पंहुचाता है। जैसे पेट के सभी रोग कब्ज, एसिडिटी आदि पाचक अग्नि के धीमे होने के कारण पैदा होते हैं।
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बीएचयू से आयुर्वेद मे एमडी व गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. परमेश्वर ने इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ यूरोलॉजी को इस बात पर चुनौती भी दी है कि ज्यादा पानी पीने से किडनी साफ होती है व शरीर के विषैले पदार्थ पेशाब के साथ बाहर आते हैं। इसके उलट डॉ. परमेश्वर ने इसे अपच, कब्ज, एसिडीटी, बीपी और त्वचा रोग की बीमारियों को इसके लिए जिम्मेदार बताया।
गर्मी में रेलवे बस स्टैंड पर बोतल से पानी पीकर प्यास बुझाते यात्री
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डॉ. परमेश्वर का कहना है कि वे अपने इस दावे व शोध को अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पटल पर रखेंगे। अगर कोई डॉक्टर मेरे दावों से सहमत नही है तो वह संवाद कर सकता है या प्रमाण ले सकता हैं।