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अध्यापकों की भर्ती का मामला, स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति की परीक्षा के नतीजे घोषित

Tue, 30 Apr 2019 06:47 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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राजधानी के स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) 4709 पदों के लिए परीक्षा परिणाम 31 मई तक जारी कर देगा। सोमवार को हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में बोर्ड ने कहा कि उसने शिक्षक सहित अन्य 49 श्रेणी के 10,057 पदों के लिए परिणाम घोषित कर दिया है। महिला शारीरिक शिक्षक के 1096 पदों के लिए 30 अप्रैल (आज) परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। जिन पदों के लिए परिणाम घोषित कर दिए गए हैं, उन पर नियुक्ति का प्रस्ताव वह 30 अप्रैल तक दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग को भेज देगा। 

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बोर्ड ने अपने हलफनामे में कहा कि संस्कृत की महिला शिक्षकों के 3230 पदों के लिए परिणाम घोषित कर वह सरकार को भेज चुका है। पीजीटी के कॉमर्स महिला व इकोनोमिक्स के 3789 पुरुष शिक्षकों का भी परिणाम घोषित कर सरकार को भेजा जा चुका है। विभिन्न श्रेणियों के जो पद रिक्त रह गए हैं, उनके लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिले। यह पद सरकार को वापस कर दिए गए हैं। उससे 67 श्रेणी के पदों पर नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी मांगे गए थे। इनमें से उसने 49 श्रेणी के पदों का परिणाम निकाल दिया है। 6029 पद भरे जा चुके हैं और 652 पद लंबित हैं। शेष 3376 पदों के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिले।

हाईकोर्ट ने 12 अप्रैल को दिल्ली सरकार व डीएसएसएसबी सहित निगमों को निर्देश दिया था कि वह रिक्त पड़े प्राधानाचार्यों के 747, शिक्षकों के 20 हजार और निगम स्कूलों के शिक्षकों के छह हजार पदों को जल्द भरें। न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने सरकार, बोर्ड व निगमों से आगे की कार्रवाई कर अपनी-अपनी स्थिति रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा था। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में एनजीओ सोशल जूरिस्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह निर्देश दिया था।
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कोर्ट ने डीएसएसएसबी से कहा था कि वह अतिरिक्त 10593 शिक्षकों की भर्ती के लिए शीघ्र विज्ञापन जारी करे। दिल्ली सरकार भी अपने स्कूलों में 20 हजार से ज्यदा शिक्षकों की भर्ती करे। साथ ही, 15 हजार शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करे और उन्हें अगला पद दे। कोर्ट ने निगमों से भी अपने स्कूलों में छह हजार शिक्षकों के रिक्त पद भरने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा था। साथ ही स्कूलों में छात्रों के खेलने की व्यवस्था करने, स्कूलों की पहचान कर वहां फुटबॉल गोल पोस्ट लगवाने को कहा था। कोर्ट ने सरकार से कहा कि जिन 50 प्रधानाचार्यों को दूसरे विभाग में काम पर लगाया गया है, उन्हें एक हफ्ते में वापस बुलाकर मूल काम सौंपा जाए।

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