पुलिस कमिश्नरी के आला अधिकारियों से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक के अधिकारी तबादले के बाद भी सरकारी कोठी खाली नहीं कर रहे हैं। इन पर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। इनसे कोठी खाली कराने और बकाया वसूलने में महकमे को काफी परेशानी आ रही है।
तत्कालीन सरकार में अलग-अलग पदों पर गुड़गांव में तैनात रहने वाले अधिकारियों का तबादले के बाद भी शहर से मोहभंग नहीं हो रहा है। उनके भवनों का काफी किराया बकाया है। हालांकि, पुलिस विभाग ने इसकी जानकारी मुख्यालय को भेज दी है। मुख्यालय ने पुलिस विभाग को भवन व सड़क निर्माण विभाग के अनुरूप कितनी जुर्माना राशि होती है, यह सम्मिलित कर भेजने को कहा है। दूसरा बिल तैयार करने पर यह पहले से तीन गुना तक बढ़ गया है। पुलिस विभाग मुख्यालय को इसकी भी जानकारी भेज चुका है।
प्रमुख बकायेदार
: के के संधू (तत्कालीन पुलिस आयुक्त) - 64.79 लाख रुपये।
: महेश्वर दयाल -24 लाख रुपये।
: भारती अरोड़ा - 6 लाख 45 हजार रुपये।
: विकास धनकड़ - 7 लाख रुपये।
: राजेश फोगाट - 8.34 लाख रुपये।
: विष्णु दयाल -11.04 लाख रुपये।
: हवा सिंह- 17 लाख रुपये।
: वीरेन्द्र सिंह- 9 .80 लाख रुपये।
: गौरव फोगाट- 8 लाख रुपये ।
: अनिल कुमार- 2 लाख रुपये।
: बाबू लाल- 2 लाख रुपये।
: सुरेन्द्र फोगाट- 7 लाख रुपये।
: प्रवीण मलिक- 7 .86 लाख रुपये।
नोट: बकायेदारों में बहुत से अधिकारी बाहर तैनात है, कुछ वापस आ गए हैं और कुछ सेवानिवृत्त भी चुके हैं।
तीन माह से पुलिस आयुक्त गेस्ट हाउस में कर रहे हैं गुजारा
प्रदेश सरकार के गठन के बाद तैनात हुए पुलिस आयुक्त नवदीप सिंह विर्क कार्यालय में स्थित गेस्ट हाउस में रह रहे हैं। पुलिस आयुक्त कार्यालय में तैनात लोगों की सबसे बड़ी समस्या है कि कब वह बाहर आ जाते हैं, कब गेस्ट हाउस में रहते लोगों को पता ही नहीं चलता है।
44 सेवादारों को पांच माह से वेतन नहीं
कमिशभनरी में 44 सेवादार तैनात हैं। जो अधिकारियों के कार्यालय से लेकर साहब की कोठियों पर काम करते हैं। उनका कहना है कि वेतन डीसी रेट पर भी नहीं मिलता है। उनको विभाग की ओर से पांच हजार रुपये प्रति माह वेतन मिलता है। पांच माह से यह कह कर वेतन नहीं दिया जा रहा है कि विभाग के पास पैसा नहीं है।