बल्लभगढ़ में लाखों लोगों को रोजगार देने वाली औद्योगिक नगरी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। हरियाणा रोडवेज के फरीदाबाद डिपो में 80 से ज्यादा बसों धूल फांक रही हैं। कई साल से डिपो में खड़ी इन बसों की हालत जर्जर हो गई है। इनमें कई बसों को तो कंडम घोषित कर दिया गया है।
लोग सालों से इंटरनल ट्रांसपोर्ट की मजबूती के लिए तैयार की गई सिटी बस योजना सही तरीके से शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। छह साल पहले शुरू की गई यह सेवा आज तक शहरवासियों के दिल में जगह नहीं बना सकी है। शुरुआत में बस 18 रूटों पर बसें चलाने की योजना थी, लेकिन महज 8 रूटों पर ही सिटी बस सेवा सिमटकर रह गई है।
अधिकारियों के मुताबिक इस समय लंबी दूरी के रूट पर 131 बसें है, जिनमें से सिर्फ 106 चालू हालत में है। हालांकि एक सप्ताह पहले 7 नई बसे डिपो भेजी गई गई हैं। बसों की कुल संख्या 113 हो गई है।
जबकि करीब 88 बसें पिछले डेढ़ साल से वर्कशॉप में खराब खड़ी हैं। इनका संचालन न होने से रोडवेज को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, जनता को सहूलियत नहीं मिल पा रही है।
नहीं मिला मेटिनेंस, हो गई खस्ता
केंद्र सरकार की योजनाएं कैसे दम तोड़ती है, इसकी बानगी फरीदाबाद में दिखती है। 2009 में जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत जिले के लिए 150 बसें मंजूर की गई थी। योजना के तहत 2010 में बसें मिलनी शुरू हुई। फरीदाबाद डिपो में 45 बसें एसी और 105 बसें मिली। इसके बावजूद शहर के लोग घटिया ट्रांसपोर्ट व्यवस्था से दुखी रहे। उल्टा बसों की सही मेटिनेंस न होने के कारण बसों की हालत खस्ता हो गई है। इनमें कभी भी कोई हादसा हो सकता है। इसी भय से चालक परिचालक इन्हें चलाने के लिए तैयार नहीं हैं। बसें रास्ते में ही खराब होकर खड़ी हो जाती हैं। जिससे यात्रियों के साथ-साथ कर्मियों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।
इन रूटों पर पड़ रहा प्रभाव
बसों के अभाव में जिले के कई रूट प्रभावित हो रहे है। वर्षो पहले जिन रूटों पर बसें दनादन दौड़ती थी, अब उस रूट पर प्राईवेट बस ऑपरेटरों ने कब्जा जमा लिया है। पलवल, व होड़ल जाने वाले रूट पर इसका सबसे ज्यादा असर है। इसी तरह तिगांव, ददसिया, जसाना, पाली, मंझावली, मोहना, फतेहपुर बिल्लौच, बागपुर, ढकौला आदि रूटों पर बसें गायब हो गई है। यात्रियों की डिमांड के मुताबिक गुडग़ांव, बाइपास रूट पर बसें कम है। बसें कम होने का निजी बस चालकों ऑटो चालकों को फायदा मिलता है।
बसें कंडम नहीं हुई है। मैकेनिकों की कमी के चलते कुछ तकनीकी खामियां आई है। इन बसों को ठीक विभिन्न रूटों पर चलाया जाएगा। जल्द ही बसों को कंपनी वर्कशॉप में भेजा जाएगा।-रीगन कुमार, महाप्रबंधक हरियाणा रोडवेज डिपो