78 सौ से ज्यादा भारतीय विदेशी जेलों में बंद हैं और इनमें से दो हजार से ज्यादा सऊदी अरब की जेलों में हैं। संविधान के अनुच्छेद 39 एक के अंतर्गत इन भारतीय नागरिकों को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है क्योंकि इन लोगों को आर्थिक तंगी व अन्य दिक्कतों को इंसाफ नहीं मिल रहा है। यह तर्क एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर कर रखा गया है।
एनजीओ प्रवासी लीगल सेल ने जनहित याचिका दायर कर विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों को निशुल्क कानूनी सहायता दिलाने का निर्देश केंद्र सरकार को देने का आग्रह किया है। याचिका में कहा गया है कि यूएन के एक सर्वे के मुताबिक दुनिया में सबसे ज्यादा प्रवासी भारतीय हैं और इनकी संख्या 1.7 करोड़ है जो दुनियाभर के देशों में रहते हैं।
पेश जनहित याचिका अधिवक्ता जोस अब्राहम के जरिए दायर कर कहा है कि विदेश में काम करने वाले भारतीय कामगारों की सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि उन्हें स्थानीय कानून की जानकारी नहीं होती और यह भी पता नहीं होता कि वह अपने अधिकारों का संरक्षण कैसे करें। कानूनी सहायता न मिलने के कारण उन भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों का विदेशी जमीन पर हनन होता है।