काला और सेंधा भी नहीं सुरक्षित
काला नमक, सेंधा नमक का इस्तेमाल भी सुरक्षित नहीं है। हमें खाने में सोडियम की मात्रा को नियंत्रित रखना चाहिए। लेकिन मरीजों का विश्लेषण बताता है कि डिब्बा-पैकेट बंद खाना व दूसरे कारणों से मरीज नमक की मात्रा को पार कर देता है। यहीं कारण है कि लोगों में बीपी का स्तर बढ़ रहा है। वहीं डॉ. विजय खैर ने बताया की खाने को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सालों से नमक का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन इन दिनों खानपान में इसका स्तर तेजी से बढ़ा, जो स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
बच्चों में बढ़ा रहा मोटापा
नेफ्रोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ. भरत शाह ने कहा कि डिब्बा व पैकेट बंद खाने के इस्तेमाल के बढ़ने से बच्चों में मोटापे के साथ दूसरी समस्याएं देखी जा रही हैं। 100 से अधिक बच्चों पर हुए शोध से पता चला कि इन खानों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए मानक से अधिक नमक का इस्तेमाल होता है। यह नमक बच्चों की जरूरत से अधिक होता है तो शरीर में विकार बनाता है। इस शोध में नमक के ज्यादा इस्तेमाल से मोटापे के साथ दूसरी समस्याएं देखी गई।
सरकार को भेजा सुझाव
डॉक्टरों ने विचार-विमर्श के बाद खाने पर नमक के मात्रा की लेबल लगाने की मांग रखी। डॉक्टरों ने बताया कि दक्षिण भारत के दो राज्यों में मिड डे मील में दिए जाने वाले खाने में नमक की मात्रा को सुधार कर बच्चों में हो सकने वाले रोग की आशंका को कम किया। इस प्रयास से सुधार दिखा। डॉक्टरों ने सरकार से मांग रखी है कि बच्चों की जरूरत के आधार पर नमक की मात्रा तय होनी चाहिए।