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डिग्री के बदले यादव सिंह ने दिलाई इंजीनियर की नौकरी!

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नोएडा अथॉरिटी के इंजीनियरद यादव सिंह के लॉकर खुलने का क्रम जारी है। इनमें से बिल्डर व ठेकेदारों को दिए गए टेंडर व जमीन आवंटन संबंधित दस्तावेज मिले हैं। विभाग इनकी जांच कर रहा है।
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सूत्र बताते हैं कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के करीब 50 नामी बिल्डर ऐसे हैं जिनमें किसी न किसी नाम से उनकी हिस्सेदारी है। इन प्रोजेक्टों से कई वर्षों तक रकम आती रहेगी। यादव सिंह और उनके सहयोगियों ने मिलकर 40 बोगस कंपनियां बनाई थीं।

इसके अलावा, यादव सिंह का राजनीतिक कनेक्शन ऐसा था कि नियमों को ताक पर रखकर कम समय में ही बड़े-बड़े काम हो जाते थे।

सूत्र बताते हैं कि एमटेक और पीएचडी की डिग्री के पीछे भी यही कहानी है। जिसने उसे यह डिग्री दिलाई, उसके बदले में यादव सिंह ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करके उनके बेटे को नोएडा प्राधिकरण में सहायक अभियंता की नौकरी दिलवा दी।
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‌डिग्री के बदले बेटे को दिलाई नौकरी

इतना ही नहीं, जिस पद तक पहुंचने में यादव सिंह को 14 साल लगते, वह वहां तक सात से आठ साल में पहुंच गए। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे विकास प्राधिकरण के चीफ इंजीनियर यादव सिंह के पास इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री थी।

उन्हें सिविल के प्रोजेक्टों का इंचार्ज बनाया गया था। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर उन्हें प्रमोशन दर प्रमोशन मिलते रहे।

1995 में यादव को प्राधिकरण में असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर बना दिया गया। तब उनके पास इंजीनियरिंग की डिग्री भी नहीं थी। डिग्री हासिल करने के लिए बाकायदा पांच साल का वक्त दिया गया। तत्कालीन ओएसडी अराधना शुक्ला ने डिग्री लेने के लिए यादव सिंह को पत्र लिखा था।

जामिया से मिलीं डिग्रियां
1995 में एपीई बनने के बाद यादव सिंह ने जामिया यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल में बीटेक की डिग्री ली थी। सूत्रों के अनुसार, 1997 में जामिया के बड़े ओहदे वाले शख्स के बेटे की नोएडा प्राधिकरण में एई के पद पर नौकरी लगवा दी गई, जिसके बाद यहीं से उन्होंने एमटेक और पीएचडी की डिग्री भी हासिल कर ली।

यादव के प्रमोशन का सफर
- 17 मार्च 1980: वह नोएडा प्राधिकरण में जूनियर इंजीनियर के पद पर नियुक्त हुए।
- 7 मार्च 1989: एपीई बनाए गए जबकि नियमानुसार 1995 में बनने थे।
- 21 अप्रैल 1995: बिना डिग्री के एपीई से पीई बना दिया गया। जबकि इंजीनियरिंग की डिग्री मिलने के बाद 2003 में प्रमोशन होना था।
- 1997: पीई से एसपीई बनाया गया जबकि 2011 में प्रमोशन होना था।
- 20 सितंबर 2009: एसपीई से सीएमई बनाया गया जबकि 2016 में प्रमोशन किया जाना था।
- 2011: अभियंता सेकंड बनाया गया जबकि 2016 में पदोन्नति होनी थी।

अलग स्टाइल के लिए भी चर्चित है यादव सिंह

यादव सिंह की बराबरी प्राधिकरण में कभी कोई आईएएस भी नहीं कर सका। लीक से हटकर काम करना उनकी आदत थी। एक बार सिक्का चल गया तो उसे बनाए रखने की कला उन्हें आती थी, लेकिन उन्हें इसका अंदाजा नहीं था कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब अपने-पराए भी साथ छोड़ देंगे। उनकी रिटायरमेंट 31 मार्च 2018 है।

सूत्रों का कहना है कि जब पिछली सरकार में उनका डंका बजता था तो प्राधिकरण के किसी भी विभाग का काम हो, उनसे पूछे बिना नहीं होता था।

यादव सिंह की पकड़ सीधे मिनी मुख्यमंत्री के रूप में चर्चित रहे ‘मुखिया’ से होती थी। जब लोगों को पता चला कि यादव सिंह ही प्राधिकरण को चला रहे हैं तो नेता से लेकर अधिकारी तक उनके यहां हाजिरी लगाने लगे।

यादव सिंह ने पुलिस की सुरक्षा नहीं ली थी, अगर वे चाहते थे तो उन्हें भारी भरकम सुरक्षा मिल सकती थी। खुद के वफादार निजी गार्ड ही उनके साथ रहते थे। दफ्तर में आने जाने के लिए प्राधिकरण की एंबेस्डर कार ही प्रयोग करते थे। उन्हें कब कहां जाना है, उनके अलावा कोई नहीं जानता था।

अलग से प्रवेश गेट बना था
यादव सिंह उस गेट से प्राधिकरण में प्रवेश नहीं करते थे, जिससे बाकी सभी अधिकारी आते थे। उनके दफ्तर के सामने खुलने वाले गेट से ही गाड़ी अंदर आती थी। शुरू से ही धीमी आवाज में बात करना भी उनकी आदत में शुमार था।

ब्रांडेड कपड़ों के शौकीन
ब्रांडेड कपड़ों के शौकीन यादव सिंह प्राधिकरण में तैनात किसी आईएएस अफसर से कम रुतबा नहीं रखते थे। छोटे-मोटे कामों के लिए लोग जब भी उनके पास जाते थे तो मना नहीं करते थे। अगर एक बार कह दिया कि कोई काम नहीं मिलेगा तो उसे प्राधिकरण में काम नहीं मिलता था। उनका पसंदीदा वाक्य था कि ‘कुछ कमाना चाहते हो’।

प्राधिकरण कर्मियों पर रहेगी ‘बिग बॉस’ की नजर

यादव सिंह के मामले से धूमिल छवि को सुधारने के लिए प्राधिकरण एक और कदम उठाने जा रहा है। कर्मचारियों पर नजर रखने के लिए प्राधिकरण में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि लापरवाह और घूसखोर कर्मचारियों पर नजर रखी जा सके।

नोएडा प्राधिकरण के आला अधिकारियों की शुक्रवार को बैठक हुई। इसमें यह निर्णय लिया गया कि आवासीय भूखंड, आवासीय भवन, ग्रुप हाउसिंग, संस्थागत, व्यावसायिक, उद्योग, नियोजन, भू-लेख विभागों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे इस तरह से लगेंगे कि ऑफिस के एक-एक कोने को कैमरे में कैद किया जा सके।

इसकी मॉनिटरिंग प्राधिकरण के आला अफसर खुद करेंगे। किसी विभाग में आम जनता की भीड़ दिखने या काम छोड़कर मौज-मस्ती कर रहे कर्मचारियों पर सीधे नजर रखी जा सकेगी। इसके अलावा पब्लिक का काम करने की एवज में घूस लेने वालों पर सीधी नजर रहेगी।

प्राधिकरण के एसीईओ अखिलेश सिंह ने बताया कि सीसीटीवी लगाने का काम अगले सप्ताह से शुरू किया जा सकता है। प्राधिकरण में सुरक्षा के लिहाज से अब तक सिर्फ गेट पर सीसीटीवी हैं। अधिकारियों के कमरों में सीसीटीवी नहीं लगेंगे।
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फिर पड़ सकता है आयकर विभाग का छापा

सूत्र बताते हैं बृहस्पतिवार शाम तक यादव सिंह द्वारा बताए गए बैंक लॉकरों को खोला जा चुका है। सामान की सूची तैयारी करने, दस्तावेजों की प्राथमिक जांच और संपत्ति का आकलन करने में आयकर विभाग की टीम लगी हुई है।

शुक्रवार को कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने आराम किया। उनमें से मिली ज्वैलरी व दस्तावेजों के जरिये अब उन लोगों के यहां छापे की तैयारी की जा रही है, जो यादव सिंह के काले कारनामों से जुड़े हुए हैं। अगले सप्ताह से आयकर विभाग फिर से छापेमारी कर सकता है।

सूत्रों ने बताया कि दो-तीन दिन में जब्त की कई संपत्ति सूचीबद्ध हो जाएगी। यादव सिंह के यहां छापा डालने से पहले उनके सगे संबंधी भी विभाग के रडार पर थे। उन पर भी विभाग का शिकंजा कस सकता है।
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