राजधानी की निजी लैब में लोग कोरोना जांच के साथ-साथ एंटीबॉडी जांच भी करा रहे हैं। इसमें पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा एंटीबॉडी मिल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जीवन शैली के कारण पुरुषों का स्वास्थ्य महिलाओं के मुकाबले खराब रहता है। इसीलिए उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है।
राजधानी की कई निजी लैब में एंटीबॉडी की जांच हो रही है। विवेक विहार में डीआर लैब के डॉक्टर अनिल सिंह ने बताया कि बीते दो महीने में करीब 300 लोग एंटीबॉडी जांच करा चुके हैं। इनमें से 40 लोगों में संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी मिली हैं, जिनमें 20 से अधिक महिलाएं थीं।
सफदरजंग अस्पताल में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर जुगल किशोर बताते हैं कि यह एक शोध का विषय है कि महिलाओं में एंटीबॉडी का स्तर ज्यादा क्यों है। हालांकि इसके कई कारण हो सकते हैं। जीवन शैली के कारण पुरुषों का स्वास्थ्य महिलाओं के मुकाबले खराब रहता है।
पुरुषों की जीवन शैली में धूम्रपान और शराब महिलाओं के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। कोरोना में सांस संबंधी समस्याएं सबसे ज्यादा होती हैं। धूम्रपान से फेंफड़ों को नुकसान होता है। इस कारण पुरुषों का स्वास्थ्य पहले ही थोड़ा खराब रहता है।
प्लाज्मा दान के लिए आगे आएं महिलाएं
एम्स के पूर्व डॉक्टर पीके सिंघल बताते हैं कि जिन महिलाओं में संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी मिल रही हैं उन्हे प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इस छोटी सी पहल से किसी का जीवन बच सकता है।