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Delhi NCR News: ‘मम्मी, हफ्ते में एक दिन घर आना, पर थाना अच्छे से चलाना’

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लक्ष्मी सिंह - फोटो : amar ujala
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दिल्ली के पहले पूर्ण महिला पुलिस स्टेशन की कमान संभालेंगी निरीक्षक लक्ष्मी सिंह
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एक बेटी की सीख और हजारों महिलाओं की उम्मीदों के बीच नई जिम्मेदारी की शुरुआत
सचिन कुमार
नई दिल्ली।“मम्मी, आप हफ्ते में एक दिन घर आना, पर अपना थाना अच्छे से चलाना।” 13 साल की एक बच्ची के ये शब्द किसी सामान्य सलाह से कहीं अधिक हैं। यह एक बेटी का अपनी मां के प्रति प्रेम, समझ और त्याग की स्वीकृति है। वह जानती है कि अब उसकी मां का अधिकांश समय घर से दूर ड्यूटी पर बीतेगा, लेकिन उसने शिकायत करने के बजाय उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए प्रेरित किया है।
दिल्ली पुलिस की निरीक्षक लक्ष्मी सिंह राजधानी के पहले पूर्ण महिला पुलिस स्टेशन की कमान संभालने जा रही हैं। ऐसे में उनकी बेटी की यह भावुक सलाह उनके लिए प्रेरणा भी है और जिम्मेदारी का एहसास भी। यह थाना सिर्फ एक नई पुलिस इकाई नहीं, बल्कि उन हजारों महिलाओं की उम्मीदों का केंद्र बनने जा रहा है जो सुरक्षा और न्याय की तलाश में पुलिस तक पहुंचती हैं।
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लक्ष्मी सिंह बताती हैं कि वह चार बहनों के बीच बड़े परिवार में पली-बढ़ीं हैं। बचपन से उन्होंने महिलाओं की समस्याओं, सामाजिक दबावों और असुरक्षाओं को करीब से देखा है। यही अनुभव उन्हें महिलाओं के लिए अधिक संवेदनशील पुलिस व्यवस्था बनाने की प्रेरणा देता है। उनका सपना है कि कोई भी महिला शिकायत दर्ज कराने से पहले डर या झिझक महसूस न करे।
लक्ष्मी के अनुसार, आज भी कई महिलाएं अपराध का शिकार होने के बावजूद पुलिस के पास जाने से कतराती हैं। उन्हें डर रहता है कि कहीं उनकी बात पर विश्वास न किया जाए या उन्हें ही दोषी न ठहरा दिया जाए। इसी सोच को बदलने के उद्देश्य से इस महिला पुलिस स्टेशन को विशेष रूप से तैयार किया गया है।

थाने में महिलाओं और बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग सुविधाएं विकसित की गई हैं। बच्चों के लिए अलग कमरा बनाया गया है ताकि महिलाएं अपने बच्चों के साथ सहजता से यहां आ सकें। महिला पुलिसकर्मियों के लिए जिम की व्यवस्था भी की गई है। पूरे परिसर का डिजाइन ऐसा रखा गया है कि यहां आने वाली किसी भी महिला को भय या असहजता महसूस न हो।
थाना प्रभारी के साथ एक मां की भी परीक्षा
लक्ष्मी सिंह के लिए यह जिम्मेदारी केवल एक नई पोस्टिंग नहीं है, बल्कि एक मां और पुलिस अधिकारी दोनों भूमिकाओं की परीक्षा भी है। बेटी की बात याद करते हुए वह भावुक हो जाती हैं। वह कहती हैं कि बेटी के शब्दों ने उन्हें यह भरोसा दिया कि परिवार उनकी जिम्मेदारियों को समझता है, लेकिन साथ ही उनके कंधों पर जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
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क्यों अहम है यह थाना
उत्तरी दिल्ली का सब्जी मंडी क्षेत्र, जहां यह थाना स्थित है, बड़ी संख्या में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं का केंद्र है। दिल्ली विश्वविद्यालय का नॉर्थ कैंपस भी इसी इलाके में है। ऐसे में यह थाना केवल कानूनी सहायता का केंद्र नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए भरोसे और सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण सहारा साबित हो सकता है।
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